मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह 17 सितंबर 2026 को न्यायिक सेवा से सेवानिवृत्त हो गए।
उनके सम्मान में जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में फुल कोर्ट फेयरवेल कार्यक्रम आयोजित किया गया। विदाई समारोह के दौरान जस्टिस सिंह ने समाज के लिए योगदान से जुड़े दो महत्वपूर्ण संकल्पों की घोषणा की। उन्होंने अपने जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF) से मिलने वाली 1.01 करोड़ रुपये की राशि प्रधानमंत्री राहत कोष में देने की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने और उनकी पत्नी इंदिरा ने मृत्यु के बाद अपना शरीर चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए दान करने का संकल्प भी लिया।
36 साल की न्यायिक सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए जस्टिस सिंह
जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने 31 मई 1990 को सिविल जज के रूप में अपने न्यायिक करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने न्यायिक सेवा के अलग-अलग पदों पर जिम्मेदारियां संभालीं। लंबे न्यायिक अनुभव के बाद 1 मई 2023 को उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। लगभग तीन वर्ष तक हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में सेवाएं देने के बाद 17 सितंबर 2026 को वे सेवानिवृत्त हो गए।
उनके सेवानिवृत्त होने के अवसर पर आयोजित फुल कोर्ट फेयरवेल में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे सहित न्यायिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद रहे। इस दौरान जस्टिस सिंह के न्यायिक कार्यकाल और उनके योगदान को याद किया गया।
GPF की 1.01 करोड़ रुपये की राशि राहत कोष में देने का संकल्प
विदाई समारोह के दौरान जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने अपने GPF से मिलने वाली 1 करोड़ 1 लाख रुपये की राशि को प्रधानमंत्री राहत कोष में देने की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि GPF की राशि उनके बैंक खाते में आने के बाद वह इसे प्रधानमंत्री राहत कोष में ट्रांसफर करेंगे।
यह घोषणा उनके रिटायरमेंट समारोह का प्रमुख हिस्सा रही। रिपोर्टों के अनुसार, जस्टिस सिंह ने यह निर्णय समाज के लिए कुछ योगदान करने की भावना से लिया है। उनके इस संकल्प को लेकर समारोह में मौजूद लोगों ने भी सराहना व्यक्त की।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में राशि को PM Relief Fund यानी प्रधानमंत्री राहत कोष में देने की बात कही गई है। इसे PM CARES Fund के रूप में लिखना सही नहीं होगा।
पत्नी के साथ देहदान का भी लिया संकल्प
जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने केवल आर्थिक योगदान की घोषणा नहीं की, बल्कि उन्होंने और उनकी पत्नी इंदिरा ने मृत्यु के बाद अपने शरीर चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए दान करने का भी संकल्प लिया है।
जस्टिस सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी की इच्छा थी कि रिटायरमेंट के बाद समाज के लिए कुछ ऐसा किया जाए जिससे दूसरों को लाभ मिल सके। इसी भावना का सम्मान करते हुए दोनों ने देहदान का संकल्प लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने जबलपुर मेडिकल कॉलेज में देहदान के लिए पंजीयन भी कराया है।
देहदान के जरिए मेडिकल छात्रों और शोधकर्ताओं को मानव शरीर की संरचना और चिकित्सा विज्ञान को समझने में मदद मिलती है। जस्टिस सिंह और उनकी पत्नी का यह निर्णय भी उनके विदाई समारोह में चर्चा का विषय रहा।
करीब तीन साल में 8,788 मामलों का निपटारा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे ने बताया कि उन्होंने लगभग तीन वर्ष के कार्यकाल में 8,788 मामलों का निपटारा किया। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि किसी न्यायाधीश के प्रदर्शन का आकलन केवल मामलों की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि फैसलों की गुणवत्ता और उनके प्रभाव के आधार पर भी किया जाना चाहिए।
जस्टिस सिंह ने अपने विदाई संबोधन में न्यायिक व्यवस्था में आए बदलावों और तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर भी बात की। उन्होंने बताया कि वर्चुअल सुनवाई और तकनीकी सुविधाओं के कारण न्याय व्यवस्था में कई बदलाव आए हैं और लोगों के लिए अदालतों तक पहुंच के तरीके भी बदले हैं।
परिवार और शुरुआती जीवन को भी किया याद
विदाई समारोह के दौरान जस्टिस सिंह ने अपने जीवन के शुरुआती दौर को भी याद किया। उन्होंने बताया कि जब वह केवल छह महीने के थे, तभी उनकी मां का निधन हो गया था। इसके बाद उनके पिता के साथ-साथ उनके मामा महेश नीलकंठ बुच और मामी निर्मला बुच ने उनका पालन-पोषण किया।
महेश नीलकंठ बुच और निर्मला बुच दोनों मध्य प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रहे और मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव के पद पर भी सेवाएं दे चुके थे। जस्टिस सिंह ने अपने जीवन में परिवार के सहयोग और मार्गदर्शन को भी याद किया।
रिटायरमेंट के बाद हाईकोर्ट में 38 जज
जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह के सेवानिवृत्त होने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 38 रह गई है, जबकि हाईकोर्ट की स्वीकृत न्यायाधीश संख्या 53 है।
जस्टिस सिंह की विदाई इसलिए भी खास रही क्योंकि उनके न्यायिक करियर के समापन के साथ समाज के लिए योगदान से जुड़े दो महत्वपूर्ण संकल्प सामने आए। एक ओर उन्होंने अपने GPF से 1.01 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री राहत कोष में देने की घोषणा की, वहीं दूसरी ओर उन्होंने और उनकी पत्नी ने देहदान का संकल्प लिया।
36 साल की न्यायिक सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह के इन फैसलों ने उनके विदाई समारोह को एक अलग संदेश दिया। उनके अनुसार, रिटायरमेंट के बाद भी समाज के लिए योगदान करने का रास्ता खुला रहता है। GPF की राशि को राहत कोष में देने और देहदान के फैसले के जरिए उन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े अपने विचार सामने रखे।














