शिव कथा में ज्योतिर्लिंगों की महिमा का गुणगान कर स्वामी प्रेमानंद जी ने जगाई भक्ति की अलख
भरथना: नगर से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित महामंशापूर्ण गंगाधर विश्वनाथ धाम रमायन शिव मंदिर परिसर में हरिद्वार आश्रम से पधारे बाल ब्रहमचारी कथा व्यास स्वामी प्रेमानंद जी महाराज के सानिध्य में चल रही नौ दिवसीय शिव महापुराण कथा के सातवें दिन भक्तों ने द्वादश ज्योतिर्लिंगों की उत्पत्ति और उनके महत्व की कथा का श्रवण किया। 9 दिनों के इस भक्ति अनुष्ठान में जैसे-जैसे कथा अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रही है, श्रद्धालुओं का उत्साह और श्रद्धा बढ़ती जा रही है। कथा के मुख्य प्रसंग- द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन: स्वामी जी ने सोमनाथ से लेकर रामेश्वरम तक, भारत के विभिन्न कोनों में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि इन स्थानों पर महादेव साक्षात चैतन्य रूप में विराजमान हैं और दर्शन मात्र से पापों का क्षय होता है। कथा में त्रिपुरारि अवतार: की कथा में भगवान शिव द्वारा त्रिपुरासुर राक्षस के वध और ‘त्रिपुरारि’ कहलाने के प्रसंग का सजीव चित्रण किया गया। स्वामी जी ने समझाया कि त्रिपुरासुर हमारे भीतर के तीन विकार—काम, क्रोध और लोभ का प्रतीक है, जिनका अंत केवल महादेव ही कर सकते हैं।

भजनों की प्रस्तुति पर पंडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर नृत्य करने लगे। आयोजन समिति के अनुसार, शेष दो दिनों में कथा और भी विशेष होने वाली है, जिसमें ‘शिव तत्व’ पर विशेष चर्चा होगी। “संसार के कण-कण में शिव व्याप्त हैं। जब मनुष्य अपने भीतर झांकता है, तो उसे काशी और कैलाश कहीं दूर नहीं, बल्कि अपने हृदय में ही मिलते हैं।”कार्यक्रम में कथा बेला पर गायक पवन, आर्गन नितिन, तबला वादक हर्ष अमित पांडा के साथ प्रंशान्त उपाध्याय, अरविंदर पोरवाल सर्राफ, कोषाध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव, मंत्री गौरव मिश्रा, यज्ञकर्ता आचार्य सर्वेश तिवारी, यज्ञपति अखिलेश उपाध्याय, किरण उपाध्याय, परीक्षित निमित देव अवस्थी, एवं रोमा अवस्थी मौजूद रहे।
रमायन स्थित शिव मंदिर पर चल रहे शिव महापुराण कथा के सातवे दिन स्वामी प्रेमांनंद जी महाराज भक्तजनों को कथा सुनाते।












