इटावा, उत्तर प्रदेश।” डर के आगे जीत है”—इस कहावत को सर्पमित्र आशीष त्रिपाठी ने एक बार फिर सच कर दिखाया। मामला है महोला सेंट्रल जेल के पास स्थित जैतिया गांव का, जहां रात के सन्नाटे में एक 9 फीट लंबा विशाल मगरमच्छ एक किसान के घर में घुस आया। ग्रामीणों में दहशत फैल गई, लेकिन हालातों से घबराने के बजाय आशीष त्रिपाठी ने मोर्चा संभाला। सुबह तड़के बिना किसी नुकसान के आशीष ने मगरमच्छ को सुरक्षित रेस्क्यू किया। इसके बाद विशेष सावधानी से उसे पैकिंग कर वन विभाग, इटावा को सौंप दिया गया। यह पूरी प्रक्रिया ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए प्रेरणा बन गई।

सर्पमित्र आशीष ने बताया, “इस मगरमच्छ की ताकत अथाह थी, लेकिन इसे बल से नहीं, बुद्धि से हराया गया।”उनकी इस सतर्कता और साहसिक कार्य के लिए क्षेत्र में उनकी खूब सराहना हो रही है, यह घटना सिर्फ एक जानवर के रेस्क्यू की नहीं, बल्कि साहस, सूझबूझ और सेवा-भाव की मिसाल है।

















