पटना। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी और पेट्रोल-डीजल की खपत को लेकर बढ़ती चिंता के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में देशवासियों से ईंधन की बचत करने की अपील की थी। प्रधानमंत्री की इस अपील का असर अब बिहार सरकार के कामकाज में भी देखने को मिल रहा है।
जानकारी के अनुसार बिहार सरकार अब मंत्रियों और वीआईपी वाहनों के इस्तेमाल में कटौती की तैयारी कर रही है। सरकार के स्तर पर पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने को लेकर गंभीर मंथन शुरू हो गया है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन मंत्रियों और संबंधित विभागों को साफ संकेत दे दिए गए हैं कि आने वाले समय में सरकारी वाहनों के उपयोग पर नियंत्रण लगाया जा सकता है।
मंत्रियों के वाहनों की होगी राशनिंग
वर्तमान व्यवस्था के तहत बिहार सरकार के मंत्रियों को सरकारी कार्यों के लिए कई वाहन उपलब्ध कराए जाते हैं। इनमें मंत्री की निजी सरकारी कार, सुरक्षा कर्मियों के लिए एस्कॉर्ट वाहन और आप्त सचिव व अन्य कर्मचारियों के लिए अलग-अलग वाहन शामिल होते हैं। कई मंत्रियों के काफिले में दो से तीन अतिरिक्त गाड़ियां भी रहती हैं।
अब सरकार इस व्यवस्था में बदलाव करने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक मंत्रियों को मिलने वाले अनलिमिटेड पेट्रोल की व्यवस्था समाप्त कर उसे सीमित किया जा सकता है। इसके साथ ही मंत्रियों के काफिले में शामिल अतिरिक्त वाहनों की संख्या भी घटाने पर विचार किया जा रहा है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि जिन वाहनों का उपयोग जरूरी नहीं है, उन्हें कम किया जाएगा ताकि पेट्रोल और डीजल की खपत में कमी लाई जा सके। यह कदम आर्थिक बचत के साथ-साथ ऊर्जा संरक्षण के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
बड़े कारकेड पर भी सरकार की नजर
बिहार में मुख्यमंत्री को छोड़कर कई अन्य वीआईपी और मंत्रियों को भी बड़े कारकेड उपलब्ध कराए जाते हैं। इनमें सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से कई वाहन शामिल रहते हैं। लेकिन अब सरकार ऐसे बड़े कारकेड की समीक्षा कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक कारकेड में शामिल वाहनों की संख्या सीमित करने पर गंभीरता से विचार चल रहा है। इस संबंध में पुलिस विभाग और सुरक्षा एजेंसियों से भी राय ली जा रही है ताकि सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुए बिना ईंधन की बचत सुनिश्चित की जा सके।
यदि यह फैसला लागू होता है तो आने वाले समय में बिहार के मंत्रियों और वीआईपी काफिलों में वाहनों की संख्या कम दिखाई दे सकती है।
क्यों बढ़ी चिंता?
दरअसल पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ेगा, जो बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करते हैं।
इसी को देखते हुए केंद्र सरकार और राज्य सरकारें पहले से ही ईंधन बचत को लेकर सतर्क नजर आ रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में लोगों से अपील की थी कि पेट्रोल और डीजल की खपत कम करें और जरूरत के अनुसार ही वाहनों का उपयोग करें।
प्रधानमंत्री की यह अपील सिर्फ आम जनता के लिए नहीं बल्कि सरकारी तंत्र और जनप्रतिनिधियों के लिए भी मानी जा रही है। बिहार सरकार की मौजूदा तैयारी को उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
जनता के बीच जा सकता है बड़ा संदेश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मंत्री और वीआईपी खुद अपने काफिलों में कटौती करते हैं तो इससे आम जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा। लंबे समय से वीआईपी संस्कृति और बड़े-बड़े काफिलों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में ईंधन बचत के नाम पर वाहन कम करना सरकार की छवि को भी मजबूत कर सकता है।
इसके अलावा सरकारी खर्च में भी कमी आएगी। हर महीने सरकारी वाहनों पर बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीजल खर्च होता है। यदि वाहनों की संख्या कम होती है तो सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ भी कम होगा।
जल्द आ सकता है आधिकारिक आदेश
हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है, लेकिन विभागीय स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
पुलिस विभाग, परिवहन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के बाद नई व्यवस्था लागू की जाएगी। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सुरक्षा व्यवस्था से समझौता किए बिना ईंधन की बचत की जा सके।
ऊर्जा संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि राज्य सरकारें इस तरह के कदम उठाती हैं तो इसका दूरगामी असर दिखाई देगा। सरकारी स्तर पर ईंधन बचत के प्रयास न सिर्फ आर्थिक रूप से फायदेमंद होंगे बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करेंगे।
पेट्रोल और डीजल की बढ़ती खपत लंबे समय से चिंता का विषय रही है। ऐसे में बिहार सरकार की यह पहल आने वाले समय में दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकती है।














