गोबर के उपलों में छिपा मिला खतरनाक कोबरा, महिला बाल-बाल बची; सर्पमित्र डॉ. आशीष त्रिपाठी ने किया सुरक्षित रेस्क्यू
इटावा। बरसात के मौसम में सांपों के रिहायशी इलाकों में निकलने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसी क्रम में इटावा के पचावली क्षेत्र में एक परिवार उस समय बड़े हादसे से बाल-बाल बच गया, जब घर में रखे गोबर के उपलों के बीच छिपा एक चार फीट लंबा स्पेक्टेकल्ड कोबरा (ब्लैक कोबरा) अचानक बाहर निकल आया। महिला जैसे ही खाना बनाने के लिए उपले उठाने लगी, कोबरा ने तेज फुफकार के साथ हमला करने की कोशिश की। महिला समय रहते पीछे हट गई और चीखते हुए बाहर निकल आई।
उपले उठाते ही सामने आ गया मौत का खतरा

जानकारी के अनुसार किसान घनश्याम के घर में उनकी पत्नी शशि रोज की तरह भोजन बनाने की तैयारी कर रही थीं। जब उन्होंने घर के एक कोने में रखे गोबर के उपले उठाने के लिए हाथ बढ़ाया, तभी उनमें छिपे बैठे कोबरा ने तेज फुफकार के साथ हमला करने का प्रयास किया। अचानक सामने सांप देखकर महिला घबरा गई और शोर मचाते हुए बाहर भाग गई।
परिजनों ने तुरंत स्थिति को समझते हुए वन्यजीव विशेषज्ञ एवं सर्पमित्र डॉ. आशीष त्रिपाठी से उनकी हेल्पलाइन के माध्यम से संपर्क किया।

कड़ी मशक्कत के बाद निकाला गया कोबरा
सूचना मिलते ही डॉ. आशीष त्रिपाठी मौके पर पहुंचे। उन्होंने सावधानीपूर्वक उपलों को हटाकर काफी मशक्कत के बाद लगभग 4 फीट लंबे स्पेक्टेकल्ड कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के दौरान आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखा गया ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।
रेस्क्यू के बाद कोबरा को वन विभाग के दिशा-निर्देशन में उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।
कोबरा के जहर को बताया बेहद खतरनाक
डॉ. आशीष त्रिपाठी ने बताया कि पकड़ा गया सांप नर स्पेक्टेकल्ड कोबरा था, जिसके विष में न्यूरोटॉक्सिक वेनम पाया जाता है। यह जहर शरीर के तंत्रिका तंत्र, श्वसन प्रणाली और मांसपेशियों को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। समय पर उपचार न मिलने पर पीड़ित की मृत्यु भी हो सकती है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचें। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल इटावा के इमरजेंसी वार्ड (कमरा नंबर 3) में सर्पदंश का उपचार उपलब्ध है।
बरसात में रखें विशेष सावधानी
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. आशीष त्रिपाठी ने बताया कि बारिश के मौसम में सांप सुरक्षित और सूखे स्थानों की तलाश में घरों, गोदामों और रसोई के आसपास पहुंच जाते हैं। इसलिए लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।

उन्होंने सलाह दी कि:
रात में सोने से पहले बिस्तर अच्छी तरह झाड़कर देखें।
बेडरूम के दरवाजों के नीचे मोटा कपड़ा लगाएं।
घर और आसपास साफ-सफाई रखें ताकि चूहे और मेढ़क न पनपें, क्योंकि यही सांपों का प्रमुख भोजन हैं।
रात में बाहर निकलते समय टॉर्च और डंडे का प्रयोग करें।
रसोई में गैस स्टोव, सिलेंडर और ईंधन के आसपास पहले अच्छी तरह जांच कर लें।
गोबर के उपले, लकड़ी, भूसा या कबाड़ उठाते समय दस्ताने या किसी औजार का उपयोग करें।
लोगों ने ली राहत की सांस
कोबरा के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद परिवार और आसपास के लोगों ने राहत की सांस ली। स्थानीय लोगों ने सर्पमित्र डॉ. आशीष त्रिपाठी की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि समय पर पहुंचकर उन्होंने एक बड़ा हादसा टाल दिया।
बरसात के मौसम में इस तरह की घटनाएं बढ़ने के कारण वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञ लगातार लोगों से जागरूक रहने और सांप दिखने पर उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना देने की अपील कर रहे हैं।














