आजम खान पर कार्रवाई करने वाले IAS आंजनेय कुमार सिंह अब यूपी छोड़ेंगे, 7 बार मिल चुका था एक्सटेंशन
लखनऊ/मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में चर्चित नाम रहे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह अब उत्तर प्रदेश से विदा होने जा रहे हैं। मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर के तौर पर कार्यरत आंजनेय कुमार सिंह की उत्तर प्रदेश में प्रतिनियुक्ति अवधि 14 अगस्त 2026 को समाप्त हो गई। उन्हें यूपी में आगे बनाए रखने के लिए अब तक कोई नया आदेश सामने नहीं आया है। वह मूल रूप से 2005 बैच के सिक्किम कैडर के आईएएस अधिकारी हैं।
आंजनेय कुमार सिंह का नाम उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में खास तौर पर तब सुर्खियों में आया, जब वह रामपुर के जिलाधिकारी थे और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़े कई मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर चर्चा में रहे। यही वजह है कि उनकी यूपी से विदाई को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी चर्चा है।
2015 में सिक्किम से यूपी आए थे आंजनेय कुमार सिंह
आंजनेय कुमार सिंह ने 16 फरवरी 2015 को उत्तर प्रदेश में प्रतिनियुक्ति पर कार्यभार संभाला था। वह सिक्किम कैडर के अधिकारी हैं और केंद्र की अनुमति से उन्हें उत्तर प्रदेश में तैनाती मिली थी।
उत्तर प्रदेश में आने के बाद उन्होंने अलग-अलग महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान उन्हें बुलंदशहर का जिलाधिकारी बनाया गया। इसके बाद उन्होंने फतेहपुर और रामपुर के डीएम के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाली। बाद में उन्हें मुरादाबाद मंडल का कमिश्नर बनाया गया।
मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर के पद पर उनकी नियुक्ति 2021 में हुई थी। इसके बाद से वह लगातार इस महत्वपूर्ण पद पर बने रहे।
रामपुर में आजम खान के खिलाफ कार्रवाई से मिली बड़ी पहचान
आंजनेय कुमार सिंह को सबसे ज्यादा पहचान रामपुर के जिलाधिकारी रहते हुए मिली। उस समय समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान रामपुर की राजनीति में बेहद प्रभावशाली माने जाते थे।
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान आंजनेय कुमार सिंह और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बीच कई बार विवाद की स्थिति बनी। चुनाव आचार संहिता के पालन को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखाई। इसी दौरान आजम खान के साथ भी उनका विवाद चर्चा में आया। बाद में आंजनेय कुमार सिंह ने आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से जुड़े मामलों में कार्रवाई की।
इसी वजह से आंजनेय कुमार सिंह को अक्सर उन अधिकारियों में गिना जाता है, जिन्होंने रामपुर में आजम खान के प्रभाव के बीच प्रशासनिक स्तर पर सख्त रुख अपनाया।
हालांकि, यह कहना कि आजम खान की पूरी राजनीतिक या कानूनी स्थिति केवल किसी एक अधिकारी की कार्रवाई का परिणाम थी, सही नहीं होगा। आजम खान से जुड़े अलग-अलग मामलों में पुलिस, प्रशासन, अदालत और अन्य संस्थाओं की अपनी-अपनी भूमिका रही है।
लगातार बढ़ता गया यूपी में कार्यकाल
आंजनेय कुमार सिंह के यूपी में रहने की सबसे खास बात उनकी लंबी प्रतिनियुक्ति रही। सामान्य तौर पर एक कैडर के अधिकारी को दूसरे कैडर में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने की अवधि सीमित होती है। लेकिन आंजनेय कुमार सिंह को लगातार एक्सटेंशन मिलते रहे।
2025 में केंद्र सरकार ने उनकी प्रतिनियुक्ति को एक साल के लिए और बढ़ाने की मंजूरी दी थी। इसके बाद उनकी यूपी में तैनाती अगस्त 2026 तक जारी रही।
रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें लगातार सात बार एक्सटेंशन मिल चुका था। यह उनकी प्रतिनियुक्ति को लेकर एक असाधारण स्थिति मानी गई, क्योंकि वह मूल रूप से सिक्किम कैडर के अधिकारी होने के बावजूद लंबे समय तक उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे।
11 साल तक यूपी में रहे
आंजनेय कुमार सिंह ने अपने प्रशासनिक करियर का एक बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश में बिताया। 2015 में यूपी आने के बाद अगस्त 2026 तक वह करीब 11 साल राज्य में लगातार अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते रहे।
द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 में मौजूदा अवधि समाप्त होने के बाद वह लगभग 11 साल उत्तर प्रदेश में बिता चुके होंगे।
यही वजह है कि उनकी यूपी से विदाई को प्रशासनिक हलकों में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
2025 में भी खत्म हो गई थी प्रतिनियुक्ति, फिर मिला था एक्सटेंशन
आंजनेय कुमार सिंह के यूपी में रहने का मामला 2025 में भी काफी चर्चा में रहा था। उनकी प्रतिनियुक्ति की अवधि 14 अगस्त 2025 को समाप्त हो गई थी। उस समय केंद्र से तत्काल एक्सटेंशन का आदेश नहीं आया था और वह मुरादाबाद कमिश्नर का पद छोड़कर छुट्टी पर चले गए थे।
इसके बाद केंद्र सरकार ने उनकी प्रतिनियुक्ति को एक साल के लिए बढ़ाने की मंजूरी दी। इससे वह दोबारा मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर के तौर पर काम करने लगे।
उस समय भी यह सवाल उठा था कि क्या उन्हें फिर से यूपी में रखा जाएगा या वह अपने मूल कैडर सिक्किम लौटेंगे। आखिरकार केंद्र से एक्सटेंशन मिलने के बाद उनकी यूपी में तैनाती जारी रही।
अब क्या होगा?
अब 14 अगस्त 2026 को उनका सातवां एक्सटेंशन भी समाप्त हो चुका है। ऐसे में अगर केंद्र सरकार की ओर से कोई नया विशेष आदेश नहीं आता है, तो उन्हें अपने मूल सिक्किम कैडर में वापस जाना होगा।
उनकी विदाई के साथ मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर पद पर नई नियुक्ति भी प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण होगी। आंजनेय कुमार सिंह लंबे समय से इस पद पर रहे हैं और मंडल के कई बड़े प्रशासनिक मामलों में उनकी भूमिका रही है।
उनके जाने के बाद यह भी देखा जाएगा कि राज्य सरकार इस पद पर किस अधिकारी को जिम्मेदारी देती है और मुरादाबाद मंडल के प्रशासनिक कामकाज में क्या बदलाव आता है।
2024 में भी चुनाव के दौरान चर्चा में रहे
आंजनेय कुमार सिंह की भूमिका को लेकर 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी राजनीतिक विवाद हुआ था। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग से उन्हें मुरादाबाद के पद से हटाने की मांग की थी। बाद में संभल में नवंबर 2024 में हुई हिंसा के बाद भी उनकी प्रशासनिक भूमिका को लेकर राजनीतिक बयानबाजी हुई थी।
इससे साफ है कि आंजनेय कुमार सिंह का कार्यकाल केवल प्रशासनिक वजहों से ही नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी चर्चा में रहा।
यूपी में सख्त अधिकारी की बनी छवि
आंजनेय कुमार सिंह की पहचान एक ऐसे अधिकारी के तौर पर बनी, जिन्होंने संवेदनशील जिलों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। बुलंदशहर, फतेहपुर और रामपुर के जिलाधिकारी के तौर पर काम करने के बाद मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर की जिम्मेदारी मिलने तक उनका प्रशासनिक अनुभव लगातार बढ़ता गया।
रामपुर में आजम खान के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई और 2019 के चुनाव के दौरान सख्त रुख ने उनकी पहचान को और मजबूत किया। उनके समर्थक जहां उन्हें कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सख्ती के लिए जाना जाने वाला अधिकारी बताते रहे, वहीं राजनीतिक विरोधियों की ओर से उनके खिलाफ अलग-अलग आरोप और सवाल भी उठते रहे।
अब सिक्किम कैडर में लौटेंगे
करीब 11 साल तक उत्तर प्रदेश में सेवाएं देने के बाद अब आंजनेय कुमार सिंह के अपने मूल कैडर सिक्किम लौटने की संभावना है। वह 2005 बैच के सिक्किम कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की वेबसाइट पर भी उनका कैडर और 2005 बैच दर्ज है।
उनका यूपी में लंबा कार्यकाल कई मायनों में असाधारण रहा। एक अधिकारी के तौर पर उन्होंने अलग-अलग जिलों में डीएम की जिम्मेदारी संभाली, फिर मंडलायुक्त के पद पर काम किया और लगातार कई बार प्रतिनियुक्ति विस्तार हासिल किया।
निष्कर्ष
आईएएस आंजनेय कुमार सिंह की उत्तर प्रदेश से विदाई राज्य की नौकरशाही में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखी जा रही है। 2015 में सिक्किम कैडर से यूपी आए आंजनेय कुमार सिंह ने करीब 11 वर्षों तक राज्य में अलग-अलग महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।
बुलंदशहर से शुरू हुआ उनका यूपी का सफर फतेहपुर और रामपुर होते हुए मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर पद तक पहुंचा। रामपुर में आजम खान से जुड़े मामलों में उनकी भूमिका ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया। इसके बाद भी उनकी प्रतिनियुक्ति लगातार बढ़ती रही और उन्हें कुल सात बार एक्सटेंशन मिलने की बात सामने आई।
अब अगस्त 2026 में उनकी प्रतिनियुक्ति अवधि समाप्त हो चुकी है। ऐसे में नया आदेश नहीं आने पर आंजनेय कुमार सिंह अपने मूल सिक्किम कैडर में लौटेंगे। उनके जाने के बाद मुरादाबाद मंडल को नया कमिश्नर मिलेगा और उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में एक चर्चित अध्याय का फिलहाल अंत हो जाएगा।












