उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में श्री केदारनाथ धाम जाने वाले मार्ग पर लैंडस्लाइड के चलते रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया।
चीड़वासा हेलीपैड के पास भूस्खलन के कारण मार्ग का एक हिस्सा प्रभावित हुआ, जिससे केदारनाथ यात्रा मार्ग पर आवाजाही बाधित हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, SDRF और DDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।
लैंडस्लाइड के कारण रास्ता प्रभावित होने के बाद यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संयुक्त टीमों ने मौके पर मोर्चा संभाला। टीमों ने यात्रियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और प्रभावित मार्ग को जल्द से जल्द खोलने के लिए अभियान चलाया। राहत एवं बचाव कार्य के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला गया।
प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त प्रयास से अब तक 6,500 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इसके अलावा यात्रा मार्ग पर मौजूद करीब 600 से 700 घोड़े-खच्चरों को भी सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। इससे यात्रियों और उनके साथ मौजूद पशुओं को लेकर बनी चिंता काफी हद तक कम हुई है।
घटना के बाद पुलिस और आपदा राहत दल लगातार मौके पर निगरानी बनाए हुए हैं। भूस्खलन से प्रभावित हिस्से का निरीक्षण किया जा रहा है और मार्ग को दोबारा सुचारु करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश और कमजोर होती मिट्टी के कारण भूस्खलन का खतरा बना रहता है। ऐसे में राहत टीमों द्वारा यात्रियों की आवाजाही को लेकर विशेष सावधानी बरती जा रही है।
केदारनाथ यात्रा मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में रास्ते के क्षतिग्रस्त होने के बाद यात्रियों को सुरक्षित निकालना राहत टीमों के लिए बड़ी चुनौती थी। पुलिस, SDRF और DDRF की संयुक्त टीमों ने समन्वय के साथ अभियान चलाया और यात्रियों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम किया।
प्रशासन की ओर से यात्रियों से अपील की गई है कि वे राहत एवं बचाव टीमों के निर्देशों का पालन करें और प्रभावित स्थानों के आसपास जाने से बचें। पहाड़ी मार्गों पर मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए श्रद्धालुओं को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है। संयुक्त टीमें मार्ग को सुरक्षित बनाने और यात्रियों की आवाजाही सामान्य करने के लिए लगातार काम कर रही हैं। प्रशासन की प्राथमिकता सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लैंडस्लाइड के बाद जिस तेजी से राहत अभियान चलाया गया, उससे हजारों यात्रियों और सैकड़ों घोड़े-खच्चरों को सुरक्षित निकालने में मदद मिली है।














