दिल्ली में अभिनेता राजपाल यादव से जुड़े चेक बाउंस मामलों में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।
अभिनेता ने उन्हें सुनाई गई तीन महीने की जेल की सजा को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया है। उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की जा रही है। यह मामला चेक बाउंस से जुड़े कई मामलों में दोषसिद्धि और सजा से संबंधित है।
जानकारी के मुताबिक, राजपाल यादव ने अपनी सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इससे पहले हाई कोर्ट ने मामले में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए राजपाल यादव की दोषसिद्धि और तीन महीने की सजा को कायम रखा था। हाई कोर्ट के इसी फैसले को अभिनेता ने अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
चेक बाउंस मामलों में राजपाल यादव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई लंबे समय से चल रही है। निचली अदालत में मामले की सुनवाई के बाद उन्हें दोषी ठहराया गया था और तीन महीने की जेल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हालांकि, हाई कोर्ट से उन्हें राहत नहीं मिली और अदालत ने दोषसिद्धि तथा सजा को बरकरार रखा।
हाई कोर्ट के फैसले के बाद राजपाल यादव ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। अब शीर्ष अदालत में उनकी याचिका पर सुनवाई हो रही है। अभिनेता की ओर से अदालत के समक्ष अपनी सजा को चुनौती दी गई है और मामले में राहत की मांग की गई है।
चेक बाउंस से जुड़े मामलों में आम तौर पर भुगतान के लिए जारी किया गया चेक बैंक द्वारा पर्याप्त धनराशि न होने या अन्य कारणों से वापस कर दिए जाने के बाद कानूनी कार्रवाई शुरू होती है। ऐसे मामलों में संबंधित पक्ष अदालत का रुख कर सकता है। राजपाल यादव से जुड़ा मामला भी इसी तरह की कानूनी प्रक्रिया से होकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा है।
राजपाल यादव बॉलीवुड के चर्चित अभिनेताओं में शामिल हैं और उन्होंने कई फिल्मों में कॉमेडी तथा सहायक भूमिकाओं के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है। ऐसे में उनके खिलाफ चल रहा यह कानूनी मामला लगातार चर्चा में रहा है।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में उनकी याचिका पर सुनवाई जारी है। अब सभी की नजरें शीर्ष अदालत के अगले आदेश पर हैं। सुप्रीम कोर्ट की ओर से मामले में क्या फैसला आता है, इससे राजपाल यादव की तीन महीने की सजा पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
गौरतलब है कि हाई कोर्ट द्वारा दोषसिद्धि और सजा बरकरार रखे जाने के बाद अभिनेता ने शीर्ष अदालत का रुख किया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। अदालत के आदेश के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि राजपाल यादव को सजा के मामले में राहत मिलती है या हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रहता है।













