मथुरा के छाता क्षेत्र में शुगर मिल को दोबारा शुरू कराने की मांग को लेकर पिछले 39 दिनों से चल रहा किसानों और स्थानीय लोगों का धरना आखिरकार समाप्त करा दिया
गया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए धरनास्थल को जबरन खाली कराया। धरना समाप्त कराने की कार्रवाई के बाद किसानों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली और बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए।
छाता शुगर मिल को लेकर लंबे समय से क्षेत्र के किसान और ग्रामीण अपनी मांग उठा रहे हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग बंद पड़ी शुगर मिल को दोबारा शुरू कराने की है। वहीं, सरकार की ओर से मिल की जगह एथेनॉल प्लांट लगाए जाने की घोषणा के बाद यह मामला और ज्यादा गरमा गया। किसानों और स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पहले से मौजूद शुगर मिल को चालू किया जाना चाहिए, जबकि सरकार की योजना मिल परिसर में एथेनॉल प्लांट स्थापित करने की है।
39 दिनों से चल रहा था धरना
छाता शुगर मिल के बाहर किसानों और स्थानीय लोगों का धरना लगातार 39 दिनों से चल रहा था। इस दौरान आसपास के गांवों से किसान, ग्रामीण और अन्य लोग धरनास्थल पर पहुंचकर आंदोलन में शामिल होते रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शुगर मिल बंद होने से क्षेत्र के गन्ना किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और उन्हें अपनी फसल के लिए दूसरे क्षेत्रों की मिलों पर निर्भर रहना पड़ता है।
धरने के दौरान किसानों ने सरकार और प्रशासन के सामने अपनी मांग रखी कि छाता शुगर मिल को दोबारा शुरू किया जाए। आंदोलनकारियों का कहना था कि क्षेत्र में गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए स्थानीय शुगर मिल का संचालन महत्वपूर्ण है। इसी मांग को लेकर लगातार कई सप्ताह तक धरना जारी रहा।
आंदोलन के दौरान ग्रामीणों और किसानों ने बड़ी संख्या में एकजुट होकर अपनी आवाज उठाई। अलग-अलग गांवों से लोगों के पहुंचने के कारण धरनास्थल पर भीड़ बढ़ती गई। किसानों का कहना था कि जब तक उनकी मांग पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
एथेनॉल प्लांट को लेकर विरोध
छाता शुगर मिल को लेकर किसानों के विरोध का एक प्रमुख कारण सरकार की ओर से एथेनॉल प्लांट लगाने की घोषणा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जिस स्थान पर शुगर मिल को दोबारा शुरू करने की मांग की जा रही थी, वहां एथेनॉल प्लांट लगाने की योजना बनाई गई है।
किसानों और स्थानीय लोगों ने एथेनॉल प्लांट का विरोध करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता शुगर मिल को दोबारा चालू कराना है। उनका तर्क है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती करते हैं और शुगर मिल शुरू होने से उन्हें स्थानीय स्तर पर गन्ने की खरीद और पेराई की सुविधा मिल सकती है।
दूसरी ओर, सरकार की ओर से एथेनॉल प्लांट को लेकर योजना आगे बढ़ाई गई है। इसी मुद्दे को लेकर किसान और प्रशासन आमने-सामने नजर आए। लंबे समय तक चले धरने के बावजूद जब मामले का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलनकारियों ने अपना विरोध जारी रखा।
प्रशासन की कार्रवाई का आरोप
धरना समाप्त कराने के दौरान प्रशासन की कार्रवाई को लेकर किसानों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने उनकी सहमति के बिना धरना समाप्त कराया और धरनास्थल खाली करा दिया। किसानों के अनुसार, उन्हें वहां से हटाने के लिए प्रशासनिक अमला और पुलिस पहुंची थी।
धरना हटाए जाने की कार्रवाई से जुड़े CCTV वीडियो के सामने आने की बात भी कही जा रही है। वीडियो को लेकर आंदोलनकारियों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। किसानों का आरोप है कि जिस तरीके से धरना समाप्त कराया गया, वह उनकी मांगों को दबाने की कोशिश है।
हालांकि, प्रशासन की ओर से कार्रवाई को लेकर आधिकारिक पक्ष और आंदोलनकारियों के आरोपों के बीच अंतर हो सकता है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की तस्वीर प्रशासन के आधिकारिक बयान और उपलब्ध वीडियो की जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
धरना हटने के बाद सड़क पर उतरे लोग
धरनास्थल से लोगों को हटाए जाने के बाद मामला शांत होने के बजाय विरोध का रूप और तेज होता दिखाई दिया। धरना खत्म कराने से नाराज लोग सड़क पर उतर आए। किसानों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया और अपनी मांगों को दोहराया।
लोगों का कहना है कि धरना खत्म कराने से उनकी मांग खत्म नहीं हुई है। उनका आंदोलन शुगर मिल को दोबारा शुरू कराने को लेकर था और वे इस मुद्दे को आगे भी उठाते रहेंगे। धरना स्थल खाली होने के बाद सड़क पर लोगों के उतरने से क्षेत्र में हलचल बढ़ गई।
स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि आने वाले दिनों में किसान और ग्रामीण आगे की रणनीति तैयार कर सकते हैं। यदि शुगर मिल को लेकर सरकार या प्रशासन की ओर से कोई नया निर्णय सामने नहीं आता है, तो आंदोलन दोबारा शुरू किए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
छाता से विधायक हैं गन्ना मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण
छाता शुगर मिल का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि छाता विधानसभा क्षेत्र से चौधरी लक्ष्मी नारायण विधायक हैं और वह उत्तर प्रदेश सरकार में गन्ना मंत्री हैं। ऐसे में उनके विधानसभा क्षेत्र में शुगर मिल को लेकर चल रहा किसानों का आंदोलन विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है।
किसानों की मांग सीधे तौर पर गन्ने और शुगर मिल से जुड़ी है। ऐसे में क्षेत्र के किसानों की नजर सरकार और गन्ना विभाग के अगले कदम पर बनी हुई है। किसान चाहते हैं कि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से स्पष्ट निर्णय लिया जाए और उन्हें बताया जाए कि छाता शुगर मिल के भविष्य को लेकर क्या योजना है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि शुगर मिल की जगह एथेनॉल प्लांट लगाया जाता है तो किसानों की उन मांगों का क्या होगा, जिनके लिए वे पिछले कई सप्ताह से धरने पर बैठे थे। यही सवाल इस पूरे विवाद का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
आगे क्या होगा, इस पर नजर
39 दिनों तक चले धरने के प्रशासनिक कार्रवाई के बाद समाप्त होने से फिलहाल धरनास्थल खाली हो गया है, लेकिन किसानों की नाराजगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। धरना समाप्त कराने के बाद लोगों का सड़क पर उतरना इस बात का संकेत है कि शुगर मिल का मुद्दा अभी भी स्थानीय स्तर पर संवेदनशील बना हुआ है।
किसानों की ओर से प्रशासन पर जबरन धरना खत्म कराने का आरोप लगाया गया है, जबकि इस कार्रवाई से जुड़े CCTV वीडियो की चर्चा भी सामने आई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है और सरकार छाता शुगर मिल तथा प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट को लेकर आगे क्या कदम उठाती है।
फिलहाल छाता शुगर मिल को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच चल रहा विवाद एक नए चरण में पहुंच गया है। 39 दिन तक चले धरने का धरनास्थल पर अंत हो गया है, लेकिन किसानों की मांग और एथेनॉल प्लांट को लेकर विरोध अभी भी चर्चा में है। आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाली प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों से तय होगा कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए धरनास्थल को जबरन खाली कराया। धरना समाप्त कराने की कार्रवाई के बाद किसानों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली और बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए।
छाता शुगर मिल को लेकर लंबे समय से क्षेत्र के किसान और ग्रामीण अपनी मांग उठा रहे हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग बंद पड़ी शुगर मिल को दोबारा शुरू कराने की है। वहीं, सरकार की ओर से मिल की जगह एथेनॉल प्लांट लगाए जाने की घोषणा के बाद यह मामला और ज्यादा गरमा गया। किसानों और स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में पहले से मौजूद शुगर मिल को चालू किया जाना चाहिए, जबकि सरकार की योजना मिल परिसर में एथेनॉल प्लांट स्थापित करने की है।
39 दिनों से चल रहा था धरना
छाता शुगर मिल के बाहर किसानों और स्थानीय लोगों का धरना लगातार 39 दिनों से चल रहा था। इस दौरान आसपास के गांवों से किसान, ग्रामीण और अन्य लोग धरनास्थल पर पहुंचकर आंदोलन में शामिल होते रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शुगर मिल बंद होने से क्षेत्र के गन्ना किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और उन्हें अपनी फसल के लिए दूसरे क्षेत्रों की मिलों पर निर्भर रहना पड़ता है।
धरने के दौरान किसानों ने सरकार और प्रशासन के सामने अपनी मांग रखी कि छाता शुगर मिल को दोबारा शुरू किया जाए। आंदोलनकारियों का कहना था कि क्षेत्र में गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए स्थानीय शुगर मिल का संचालन महत्वपूर्ण है। इसी मांग को लेकर लगातार कई सप्ताह तक धरना जारी रहा।
आंदोलन के दौरान ग्रामीणों और किसानों ने बड़ी संख्या में एकजुट होकर अपनी आवाज उठाई। अलग-अलग गांवों से लोगों के पहुंचने के कारण धरनास्थल पर भीड़ बढ़ती गई। किसानों का कहना था कि जब तक उनकी मांग पर ठोस फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
एथेनॉल प्लांट को लेकर विरोध
छाता शुगर मिल को लेकर किसानों के विरोध का एक प्रमुख कारण सरकार की ओर से एथेनॉल प्लांट लगाने की घोषणा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जिस स्थान पर शुगर मिल को दोबारा शुरू करने की मांग की जा रही थी, वहां एथेनॉल प्लांट लगाने की योजना बनाई गई है।
किसानों और स्थानीय लोगों ने एथेनॉल प्लांट का विरोध करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता शुगर मिल को दोबारा चालू कराना है। उनका तर्क है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती करते हैं और शुगर मिल शुरू होने से उन्हें स्थानीय स्तर पर गन्ने की खरीद और पेराई की सुविधा मिल सकती है।
दूसरी ओर, सरकार की ओर से एथेनॉल प्लांट को लेकर योजना आगे बढ़ाई गई है। इसी मुद्दे को लेकर किसान और प्रशासन आमने-सामने नजर आए। लंबे समय तक चले धरने के बावजूद जब मामले का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलनकारियों ने अपना विरोध जारी रखा।
प्रशासन की कार्रवाई का आरोप
धरना समाप्त कराने के दौरान प्रशासन की कार्रवाई को लेकर किसानों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासन ने उनकी सहमति के बिना धरना समाप्त कराया और धरनास्थल खाली करा दिया। किसानों के अनुसार, उन्हें वहां से हटाने के लिए प्रशासनिक अमला और पुलिस पहुंची थी।
धरना हटाए जाने की कार्रवाई से जुड़े CCTV वीडियो के सामने आने की बात भी कही जा रही है। वीडियो को लेकर आंदोलनकारियों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। किसानों का आरोप है कि जिस तरीके से धरना समाप्त कराया गया, वह उनकी मांगों को दबाने की कोशिश है।
हालांकि, प्रशासन की ओर से कार्रवाई को लेकर आधिकारिक पक्ष और आंदोलनकारियों के आरोपों के बीच अंतर हो सकता है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की तस्वीर प्रशासन के आधिकारिक बयान और उपलब्ध वीडियो की जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
धरना हटने के बाद सड़क पर उतरे लोग
धरनास्थल से लोगों को हटाए जाने के बाद मामला शांत होने के बजाय विरोध का रूप और तेज होता दिखाई दिया। धरना खत्म कराने से नाराज लोग सड़क पर उतर आए। किसानों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया और अपनी मांगों को दोहराया।
लोगों का कहना है कि धरना खत्म कराने से उनकी मांग खत्म नहीं हुई है। उनका आंदोलन शुगर मिल को दोबारा शुरू कराने को लेकर था और वे इस मुद्दे को आगे भी उठाते रहेंगे। धरना स्थल खाली होने के बाद सड़क पर लोगों के उतरने से क्षेत्र में हलचल बढ़ गई।
स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि आने वाले दिनों में किसान और ग्रामीण आगे की रणनीति तैयार कर सकते हैं। यदि शुगर मिल को लेकर सरकार या प्रशासन की ओर से कोई नया निर्णय सामने नहीं आता है, तो आंदोलन दोबारा शुरू किए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
छाता से विधायक हैं गन्ना मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण
छाता शुगर मिल का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि छाता विधानसभा क्षेत्र से चौधरी लक्ष्मी नारायण विधायक हैं और वह उत्तर प्रदेश सरकार में गन्ना मंत्री हैं। ऐसे में उनके विधानसभा क्षेत्र में शुगर मिल को लेकर चल रहा किसानों का आंदोलन विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है।
किसानों की मांग सीधे तौर पर गन्ने और शुगर मिल से जुड़ी है। ऐसे में क्षेत्र के किसानों की नजर सरकार और गन्ना विभाग के अगले कदम पर बनी हुई है। किसान चाहते हैं कि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से स्पष्ट निर्णय लिया जाए और उन्हें बताया जाए कि छाता शुगर मिल के भविष्य को लेकर क्या योजना है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि शुगर मिल की जगह एथेनॉल प्लांट लगाया जाता है तो किसानों की उन मांगों का क्या होगा, जिनके लिए वे पिछले कई सप्ताह से धरने पर बैठे थे। यही सवाल इस पूरे विवाद का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
आगे क्या होगा, इस पर नजर
39 दिनों तक चले धरने के प्रशासनिक कार्रवाई के बाद समाप्त होने से फिलहाल धरनास्थल खाली हो गया है, लेकिन किसानों की नाराजगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। धरना समाप्त कराने के बाद लोगों का सड़क पर उतरना इस बात का संकेत है कि शुगर मिल का मुद्दा अभी भी स्थानीय स्तर पर संवेदनशील बना हुआ है।
किसानों की ओर से प्रशासन पर जबरन धरना खत्म कराने का आरोप लगाया गया है, जबकि इस कार्रवाई से जुड़े CCTV वीडियो की चर्चा भी सामने आई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है और सरकार छाता शुगर मिल तथा प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट को लेकर आगे क्या कदम उठाती है।
फिलहाल छाता शुगर मिल को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच चल रहा विवाद एक नए चरण में पहुंच गया है। 39 दिन तक चले धरने का धरनास्थल पर अंत हो गया है, लेकिन किसानों की मांग और एथेनॉल प्लांट को लेकर विरोध अभी भी चर्चा में है। आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाली प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियों से तय होगा कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।














