नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से पहले ग्लेशियर टूटने का खौफनाक वीडियो आया सामने, ऊंचाई से कैद हुआ पूरा मंजर
नेपाल और तिब्बत की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से जुड़ा एक बेहद खौफनाक वीडियो अब सामने आया है। वीडियो में पहाड़ की बेहद ऊंची जगह से ग्लेशियर और चट्टानों के एक बड़े हिस्से को अचानक टूटकर नीचे घाटी की ओर गिरते हुए देखा जा सकता है। देखते ही देखते बर्फ, चट्टानों और मलबे का विशाल हिस्सा नीचे की तरफ तेजी से बढ़ता है और इसके बाद आसमान में धूल तथा मलबे का घना गुबार उठता दिखाई देता है।
बताया जा रहा है कि यह वीडियो एक टूर गाइड के समूह ने तिब्बत में ऊंचाई वाले इलाके से शूट किया था। जिस स्थान से यह दृश्य रिकॉर्ड किया गया, वहां से पूरे पहाड़ी क्षेत्र का काफी बड़ा हिस्सा दिखाई दे रहा था। इसी वजह से कैमरे में ग्लेशियर के टूटने और उसके बाद मलबे के नीचे की ओर बढ़ने का पूरा दृश्य कैद हो गया।
यह वीडियो इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। बाद की वैज्ञानिक जांच में सामने आया कि ग्लेशियर के बड़े हिस्से के टूटने से बर्फ और चट्टानों का मलबा नीचे नदी में पहुंचा, जिसके बाद तेज बहाव वाली बाढ़ और मलबे का सैलाब घाटियों की ओर बढ़ा।
कैमरे में कैद हुआ ग्लेशियर टूटने का खौफनाक पल
वीडियो में शुरुआत में पहाड़ों का सामान्य दृश्य दिखाई देता है। इसके बाद अचानक ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा पहाड़ी ढलान से अलग होता नजर आता है। बर्फ और चट्टानों का भारी हिस्सा बेहद तेजी से नीचे गिरता है।
कुछ ही पलों में पहाड़ की ढलान पर धूल और मलबे का बड़ा गुबार उठ जाता है। मलबे के तेजी से नीचे की ओर बढ़ने के साथ पूरा क्षेत्र धुंधले बादल में घिरता हुआ दिखाई देता है।
वीडियो को ऊंचाई से शूट किए जाने के कारण ग्लेशियर के टूटने का पैमाना साफ नजर आता है। यह कोई छोटा हिमस्खलन नहीं था, बल्कि बर्फ और चट्टानों का बहुत बड़ा हिस्सा अचानक नीचे की ओर खिसकता दिखाई देता है।
यही मलबा आगे जाकर नदी और घाटी के बहाव को प्रभावित करने वाली बड़ी घटना का हिस्सा बना।
26 अगस्त को आई थी विनाशकारी बाढ़
26 अगस्त को नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र की सीमा के पास अचानक तेज बाढ़ आई थी। बाढ़ इतनी तेजी से आगे बढ़ी कि कई इलाकों में लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
नेपाल में कई गांवों, सड़कों, पुलों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ। बाढ़ के तेज बहाव में वाहन बह गए और कई इलाकों में घरों तथा दुकानों में मलबा भर गया।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, आपदा में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। राहत एवं बचाव अभियान कठिन पहाड़ी परिस्थितियों के बीच जारी है।
पहले भूकंप को लेकर हुआ था भ्रम
आपदा के शुरुआती घंटों में इस बात को लेकर भ्रम की स्थिति थी कि कहीं भूकंप की वजह से तो यह घटना नहीं हुई। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में भूकंपीय गतिविधि का जिक्र किया गया था।
बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण सहित वैज्ञानिक आकलनों में यह स्पष्ट किया गया कि जिस भूकंपीय झटके को शुरुआती तौर पर भूकंप समझा गया था, वह वास्तव में ग्लेशियर से बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के टूटने तथा मलबे के तेजी से नीचे आने से पैदा हुआ कंपन था। यानी मुख्य कारण एक बड़े ग्लेशियल कोलैप्स और उससे जुड़े मलबे का बहाव माना गया।
इस जानकारी के सामने आने के बाद ग्लेशियर टूटने वाले वीडियो की अहमियत और बढ़ गई है।
ग्लेशियर का मलबा नदी में पहुंचा
वैज्ञानिकों के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक, ग्लेशियर से टूटकर नीचे आया बर्फ और चट्टानों का भारी मलबा नदी की घाटी में पहुंचा। इसके बाद नदी का बहाव अचानक बेहद खतरनाक रूप ले गया।
पहाड़ी इलाकों में नदियां संकरी घाटियों से होकर गुजरती हैं। ऐसे स्थानों पर यदि अचानक भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान, मिट्टी और पानी पहुंच जाए तो बहाव की ताकत कई गुना बढ़ सकती है।
यही वजह है कि बाढ़ का पानी केवल पानी नहीं था। इसमें भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर, चट्टान, पेड़ और अन्य मलबा भी शामिल था। इस तरह का मलबे वाला तेज बहाव अपने रास्ते में आने वाली सड़क, पुल, वाहन और इमारतों को बेहद कम समय में नुकसान पहुंचा सकता है।
कई जगहों पर तबाही के निशान
बाढ़ के बाद सामने आए वीडियो और तस्वीरों में कई इलाकों में तबाही का स्तर साफ दिखाई दिया। कहीं सड़कें टूट गईं तो कहीं पुल तेज बहाव में बह गए। कई स्थानों पर घरों के आसपास भारी मात्रा में मिट्टी और मलबा जमा हो गया।
उपग्रह तस्वीरों और घटनास्थल से सामने आए दृश्यों में भी बाढ़ के बाद बदले हुए भू-दृश्य का पता चलता है। कई इलाकों में नदी का रास्ता और आसपास का क्षेत्र मलबे से ढक गया।
नेपाल के रासुवागढ़ी और आसपास के क्षेत्र में बाढ़ का प्रभाव विशेष रूप से गंभीर रहा। यहां से सामने आए CCTV और वीडियो में लोगों को तेज बहाव से बचने के लिए भागते हुए भी देखा गया।
ऊंचाई से रिकॉर्ड किया गया वीडियो क्यों खास है?
आपदा के दौरान सामने आए ज्यादातर वीडियो निचले इलाकों से रिकॉर्ड किए गए थे, जहां लोग बाढ़ के पानी को अपनी ओर आते हुए देख रहे थे। लेकिन ग्लेशियर टूटने वाला यह वीडियो पहाड़ी की ऊंचाई से रिकॉर्ड किया गया है।
इस कारण इसमें घटना का शुरुआती हिस्सा दिखाई देता है। वीडियो में यह समझने में मदद मिलती है कि किस तरह पहाड़ के ऊपरी हिस्से से बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा नीचे की ओर गिरा और फिर धूल-मलबे का गुबार फैल गया।
ऐसे वीडियो वैज्ञानिकों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं क्योंकि इनमें घटना का समय, दिशा और मलबे के फैलाव जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। हालांकि किसी वीडियो से अकेले पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया तय नहीं की जा सकती और इसके लिए उपग्रह तस्वीरों, स्थल निरीक्षण तथा अन्य वैज्ञानिक आंकड़ों की जरूरत होती है।
हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते प्राकृतिक खतरे
इस घटना ने हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों और पहाड़ी ढलानों की संवेदनशीलता को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। हिमालय दुनिया के सबसे ऊंचे और भौगोलिक रूप से बेहद जटिल पर्वतीय क्षेत्रों में शामिल है।
यहां ग्लेशियर, बर्फ, चट्टान और पानी की बड़ी मात्रा ऊंचाई वाले इलाकों में जमा रहती है। जब किसी वजह से ग्लेशियर या पहाड़ी ढलान का बड़ा हिस्सा टूटता है तो उसका प्रभाव नीचे घाटियों तक पहुंच सकता है।
विशेषज्ञ लंबे समय से हिमालयी इलाकों में ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की निगरानी तथा शुरुआती चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। ताजा आपदा ने इस आवश्यकता को और गंभीर बना दिया है।
बचाव अभियान के सामने बड़ी चुनौती
बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम पहाड़ी इलाका है। कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हुआ है।
इसके अलावा भारी मलबे के कारण कई रास्ते बंद हो गए हैं। बिजली और संचार व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में लापता लोगों की तलाश और राहत सामग्री पहुंचाना आसान नहीं है।
नेपाल और तिब्बत की ओर बचाव टीमें प्रभावित इलाकों में काम कर रही हैं। हेलीकॉप्टरों की मदद से भी लोगों को निकालने और जरूरी सामान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
वीडियो ने फिर दिखाया प्रकृति का भयावह रूप
ग्लेशियर टूटने का सामने आया यह वीडियो प्राकृतिक आपदा की भयावहता को बेहद करीब से दिखाता है। कुछ सेकंड के भीतर पहाड़ का विशाल हिस्सा टूटकर नीचे आता है और धूल-मलबे का गुबार पूरे क्षेत्र को ढक लेता है।
इसके बाद इसी क्षेत्र में आई तेज बाढ़ ने नेपाल और तिब्बत में भारी तबाही मचाई। यह घटना दिखाती है कि ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली एक घटना का असर कुछ ही समय में कई किलोमीटर दूर स्थित आबादी वाले इलाकों तक पहुंच सकता है।
फिलहाल इस आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है। लापता लोगों की तलाश की जा रही है और नुकसान का आकलन भी लगातार किया जा रहा है। सामने आया ग्लेशियर टूटने का वीडियो अब उस भयावह घटना को समझने का एक महत्वपूर्ण दृश्य दस्तावेज बन गया है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे बर्फ और चट्टानों का विशाल हिस्सा अचानक पहाड़ से टूटकर नीचे गिरा और उसके बाद आसमान में मलबे का भयानक गुबार छा गया।













