
महेवा ब्लॉक के ग्राम अहेरीपुर से सलेमपुर जाने वाली सड़क की हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो लोग आधुनिक युग में नहीं बल्कि किसी आदिकाल में जीवन यापन कर रहे हों। करीब 2 से 2.5 किलोमीटर की दूरी तय करने में मोटरसाइकिल सवारों को 15 से 20 मिनट तक का समय लग रहा है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, उखड़ी डामर और कीचड़ ने राहगीरों का जीवन दूभर कर दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा—कोई भी इस मार्ग से गुजरता है तो मन ही मन व्यवस्था को कोसता है। लोगों का सवाल है कि क्या यही वह सरकार है जिसने प्रदेश को “गड्ढा मुक्त” बनाने का वादा किया था?
बरसात हो या धूप, यह सड़क हर मौसम में परेशानी का कारण बनी हुई है। स्कूल जाने वाले बच्चों को गिरने का डर सताता है, तो मरीजों को अस्पताल ले जाने में परिजनों की सांसें अटक जाती हैं। कई बार बाइक सवार गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग मानो आंखें मूंदे बैठा है।
ग्रामीणों ने बताया कि कई बार शिकायतें की गईं, संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ हाथ नहीं लगा। लोगों में आक्रोश इस कदर है कि वे कहने लगे हैं—“हमारी जिंदगी जानवरों से भी बदतर हो गई है।”
अब सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक अहेरीपुर और सलेमपुर के बीच की यह सड़क यूं ही बदहाल पड़ी रहेगी? क्या जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान देंगे या फिर जनता यूं ही गड्ढों में हिचकोले खाती रहेगी? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।













