उत्तर प्रदेश में हाथरस कांड के पीड़ित दलित परिवार के पुनर्वास को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि पीड़ित परिवार को गाजियाबाद या नोएडा में घर उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए सरकार को तीन महीने की समयसीमा दी गई है। इसके साथ ही परिवार के एक सदस्य को नौकरी उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया गया है।
दरअसल, हाथरस कांड के बाद से पीड़ित परिवार लगातार सुरक्षा और पुनर्वास को लेकर चिंता जताता रहा है। परिवार की मांग थी कि उसे हाथरस से बाहर ऐसे स्थान पर बसाया जाए, जहां वह सुरक्षित माहौल में सामान्य जिंदगी शुरू कर सके। परिवार की ओर से गाजियाबाद या नोएडा में पुनर्वास की इच्छा जताई गई थी।
वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से परिवार को अलीगढ़, कासगंज या एटा में बसाने का विकल्प दिया गया था। परिवार इन स्थानों पर जाने के लिए तैयार नहीं था। उसका कहना था कि सुरक्षा की दृष्टि से वह इन क्षेत्रों में रहना नहीं चाहता। इसी विवाद को लेकर मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। अदालत ने माना कि जब पीड़ित परिवार ने गाजियाबाद या नोएडा में पुनर्वास की मांग की है तो सरकार को उस मांग पर उचित तरीके से विचार करना चाहिए था। अदालत ने सरकार के रवैये को अड़ियल बताते हुए परिवार की सुरक्षा और भविष्य को प्राथमिकता देने की बात कही।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर परिवार के लिए गाजियाबाद या नोएडा में आवास की व्यवस्था करनी होगी। इसके अलावा परिवार के एक सदस्य को उसकी योग्यता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी।
हाथरस की यह घटना 14 सितंबर 2020 को सामने आई थी। हाथरस जिले में एक दलित युवती पर कथित तौर पर गैंगरेप का आरोप लगा था। गंभीर हालत में युवती को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और बाद में उसकी मौत हो गई।
युवती की मौत के बाद उसके शव के अंतिम संस्कार को लेकर भी बड़ा विवाद खड़ा हुआ था। परिवार की सहमति और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। रात के समय शव का अंतिम संस्कार किए जाने के बाद मामले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। इस घटना को लेकर पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।
मामले की जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई। ट्रायल कोर्ट ने तीन आरोपियों को बरी कर दिया, जबकि एक आरोपी को दोषी ठहराते हुए वर्ष 2023 में सजा सुनाई गई। इस फैसले के बाद भी पीड़ित परिवार की सुरक्षा और पुनर्वास का मुद्दा लगातार अदालत के सामने बना रहा।
घटना के बाद परिवार को CRPF की सुरक्षा दी गई। लंबे समय से सुरक्षा घेरे में रहने के कारण परिवार की सामान्य जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई। परिवार के सदस्यों की आवाजाही, रोजगार और सामाजिक जीवन पर भी इसका असर पड़ा। परिवार का कहना रहा है कि वह घटना के बाद से पहले की तरह स्वतंत्र और सामान्य जीवन नहीं जी पा रहा है।
पीड़ित परिवार का कहना है कि हाथरस में रहना उसके लिए मानसिक और सामाजिक रूप से आसान नहीं है। परिवार चाहता है कि उसे किसी दूसरे शहर में बसाया जाए, जहां सुरक्षा के साथ बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और भविष्य की बेहतर व्यवस्था हो सके। इसी वजह से परिवार ने गाजियाबाद और नोएडा को अपनी प्राथमिकता बताया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का ताजा आदेश इसी लंबे विवाद में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने साफ कर दिया है कि पुनर्वास का फैसला केवल सरकार की सुविधा के आधार पर नहीं किया जा सकता। पीड़ित परिवार की सुरक्षा, उसकी परिस्थितियों और भविष्य को भी ध्यान में रखना होगा।
अब सरकार के सामने तीन महीने के भीतर अदालत के आदेश का पालन करने की चुनौती है। उसे परिवार के लिए उपयुक्त आवास की व्यवस्था करने के साथ-साथ एक सदस्य के रोजगार की व्यवस्था भी करनी होगी। हाईकोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि आदेश के अनुपालन में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
हाथरस कांड को घटना के बाद कई साल बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवार की जिंदगी अभी तक सामान्य नहीं हो सकी है। एक ओर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी और मामले में दोषसिद्धि हुई, वहीं दूसरी ओर परिवार आज भी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जीवन जी रहा है।
हाईकोर्ट का यह आदेश ऐसे समय में आया है जब परिवार लंबे समय से अपने पुनर्वास की मांग कर रहा था। अब देखना होगा कि राज्य सरकार अदालत के निर्देश के मुताबिक कितनी जल्दी कार्रवाई करती है और परिवार को गाजियाबाद या नोएडा में स्थायी आवास तथा रोजगार उपलब्ध कराया जाता है।
अदालत के निर्देश का मूल उद्देश्य पीड़ित परिवार को ऐसा सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां वह सुरक्षा के साये से बाहर निकलकर सामान्य जीवन शुरू कर सके। तीन महीने की समयसीमा तय होने के बाद अब इस मामले में सरकार की कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी।














