योग गुरु बाबा रामदेव ने साधु-संतों के जीवन, नशे के इस्तेमाल और पतंजलि के देसी घी को लेकर अपनी बात रखी है।
उन्होंने कहा कि संन्यास लेने का उद्देश्य गांजा, भांग या धतूरा जैसे नशीले पदार्थों का सेवन करना नहीं है। रामदेव ने स्पष्ट किया कि वह खुद गांजे की चिलम नहीं लगाते हैं और नशे के सेवन को साधु जीवन से जोड़ने पर अपनी आपत्ति जताई।
बाबा रामदेव ने कहा, “हम सुल्फइया साधु नहीं हैं। हमने संन्यास गांजा, भांग, धतूरा पीने के लिए नहीं लिया है।” उन्होंने आगे कहा कि नशे का सेवन करने वालों को साधु कहने पर भी सवाल उठाया। रामदेव के मुताबिक, साधु जीवन का उद्देश्य संयम, अनुशासन और आध्यात्मिक साधना है, न कि नशीले पदार्थों का सेवन।
उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि वह गांजे की चिलम नहीं लगाते हैं। उनका यह बयान साधु-संतों और नशे के बीच संबंध को लेकर चलने वाली चर्चाओं के संदर्भ में आया है। रामदेव ने अपने व्यक्तिगत जीवन और संन्यास की बात करते हुए यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि उनके लिए साधु जीवन नशे से पूरी तरह अलग है।
पतंजलि के देसी घी को लेकर भी बयान
इसी बातचीत के दौरान बाबा रामदेव ने पतंजलि के देसी घी को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि पतंजलि का देसी घी आज तक दुनिया की किसी लैब में फेल नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कई लोग यह सवाल करते हैं कि आखिर करीब 700 रुपये में ओरिजनल घी कैसे बेचा जा सकता है।
रामदेव ने घी की कीमत और गुणवत्ता को लेकर उठने वाले सवालों का जिक्र करते हुए कहा कि कम कीमत पर घी उपलब्ध कराने को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल रहते हैं। उन्होंने अपने बयान में पतंजलि के घी की गुणवत्ता का बचाव करते हुए कहा कि उनका देसी घी लैब टेस्ट में फेल नहीं हुआ है।
यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि किसी खाद्य उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित लैब की जांच रिपोर्ट, परीक्षण की पद्धति और नियामकीय मानकों के आधार पर ही निकाला जाता है। बाबा रामदेव का लैब टेस्ट से जुड़ा बयान उनके द्वारा किया गया दावा है।
एक लाख रुपये वाला घी बेचने की बात
बाबा रामदेव ने बातचीत के दौरान एक महंगे घी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अब वह सोने की भस्म डालकर एक लाख रुपये वाला घी बेचेंगे। उनके इस बयान के बाद “सोने की भस्म वाला घी” चर्चा में आ गया है।
रामदेव ने इसे सामान्य देसी घी से अलग एक प्रीमियम उत्पाद के तौर पर पेश करने की बात कही। उनके बयान में सामान्य घी की कीमत और प्रस्तावित महंगे घी की कीमत के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। एक तरफ उन्होंने करीब 700 रुपये में देसी घी बेचने को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब दिया, वहीं दूसरी तरफ सोने की भस्म वाले घी की कीमत एक लाख रुपये तक रखने की बात कही।
हालांकि, इस तरह के उत्पाद की वास्तविक कीमत, उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री, निर्माण प्रक्रिया, उपलब्धता और बिक्री से जुड़ी पूरी जानकारी आधिकारिक उत्पाद घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
साधु जीवन में नशे को लेकर रामदेव की टिप्पणी
बाबा रामदेव ने अपने बयान में साधु जीवन और नशे के बीच अंतर पर जोर दिया। उन्होंने गांजा, भांग और धतूरा जैसे पदार्थों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने संन्यास इन चीजों का सेवन करने के लिए नहीं लिया है।
उन्होंने नशे का सेवन करने वाले लोगों के लिए “नशेड़ी”, “गंजेड़ी” और “भंगेड़ी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ऐसे लोगों को साधु नहीं माना जाना चाहिए। रामदेव ने अपने बारे में भी स्पष्ट किया कि वह गांजे की चिलम नहीं लगाते हैं।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब धार्मिक परंपराओं और कुछ साधु समुदायों के संदर्भ में भांग या गांजे के इस्तेमाल को लेकर सार्वजनिक चर्चाएं होती रहती हैं। हालांकि, अलग-अलग धार्मिक और साधु परंपराओं में इन पदार्थों को लेकर मान्यताएं अलग हो सकती हैं। रामदेव ने अपने बयान में अपनी व्यक्तिगत और वैचारिक स्थिति स्पष्ट की है।
देसी घी की कीमत पर उठने वाले सवाल
बाबा रामदेव ने देसी घी की कीमत को लेकर होने वाली चर्चा का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि जब करीब 700 रुपये में देसी घी उपलब्ध कराया जाता है तो लोग सवाल करते हैं कि इतनी कीमत में असली घी कैसे बेचा जा सकता है।
खाद्य उत्पादों की कीमत कई चीजों पर निर्भर करती है। इसमें कच्चे माल की कीमत, दूध और वसा की उपलब्धता, उत्पादन, पैकेजिंग, परिवहन, वितरण और अन्य व्यावसायिक लागत शामिल होती हैं। किसी उत्पाद के असली या नकली होने का निर्धारण केवल कीमत देखकर नहीं किया जा सकता। इसके लिए निर्धारित खाद्य गुणवत्ता मानकों और वैज्ञानिक परीक्षणों को आधार बनाया जाता है।
रामदेव ने अपने बयान में पतंजलि के घी की गुणवत्ता पर भरोसा जताया है। वहीं, उनके द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित परीक्षण रिपोर्ट और आधिकारिक रिकॉर्ड से ही की जा सकती है।
“स्वर्ण घी” के बयान से बढ़ी चर्चा
बाबा रामदेव के बयान का दूसरा प्रमुख हिस्सा सोने की भस्म वाला घी है। उन्होंने कहा कि अब एक लाख रुपये वाला घी बेचेंगे, जिसमें सोने की भस्म डाली जाएगी। इस बयान के बाद सोशल मीडिया और लोगों के बीच इस संभावित उत्पाद को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है।
हालांकि, सोने की भस्म वाले किसी खाद्य उत्पाद के सेवन से जुड़े स्वास्थ्य लाभ या सुरक्षा के बारे में केवल बयान के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। ऐसे उत्पाद के लिए सामग्री, निर्माण प्रक्रिया, खाद्य सुरक्षा नियमों और संबंधित नियामकीय मंजूरी की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल बाबा रामदेव का बयान दो अलग-अलग मुद्दों को लेकर चर्चा में है। पहले हिस्से में उन्होंने साधु जीवन और नशे को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। दूसरे हिस्से में उन्होंने पतंजलि के देसी घी की गुणवत्ता और कीमत का बचाव करते हुए सोने की भस्म वाला एक लाख रुपये का घी बेचने की बात कही है।
बाबा रामदेव के इन बयानों के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित “स्वर्ण घी” कब बाजार में आता है, उसमें किस प्रकार की सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है और कंपनी की ओर से इसकी कीमत तथा उत्पाद से जुड़ी आधिकारिक जानकारी क्या जारी की जाती है।













