
अहेरीपुर।
जनपद इटावा के ब्लॉक महेवा की मॉडल पंचायत टड़वा स्माईलपुर से एक झकझोर देने वाला और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां कुछ दिव्यांग ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान हरिकेश यादव पर आवास दिलाने के नाम पर खुलेआम पैसे वसूलने का गंभीर आरोप लगाया है।
टड़वा निवासी सत्यपाल सिंह, जो एक पैर से दिव्यांग होने के साथ-साथ कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी जूझ रहे हैं, ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान ने उनसे प्रधानमंत्री आवास दिलाने के नाम पर 10 हजार रुपये ले लिये। महीनों बीत गए, लेकिन न आवास मिला और न ही पैसे वापस हुए। पीड़ित सत्यपाल आज भी टूटी उम्मीदों और बीमारी के दर्द के साथ न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
इसी गांव के एक पूरी तरह से दिव्यांग युवक राजा का दर्द और भी ज्यादा मार्मिक है। राजा का कहना है कि उससे भी दिव्यांग आवास के लिए रुपये लिये गए, लेकिन आज वह घर के बजाय दर-दर भटकने को मजबूर है। न छत मिली, न सहारा—सिर्फ आश्वासन और ठगी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि टड़वा स्माईलपुर पंचायत को हाल ही में विकास के लिए “मॉडल पंचायत” का दर्जा दिया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि
👉 क्या दिव्यांगों से पैसे वसूलना ही मॉडल पंचायत की पहचान है?
👉 क्या सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं गरीब और दिव्यांगों तक पहुंचने से पहले ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं?
ग्रामीणों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस “मॉडल पंचायत” के काले सच पर क्या कार्रवाई करता है या फिर दिव्यांगों की आवाज एक बार फिर फाइलों में दबकर रह जाएगी।
🛑 यह मामला सिर्फ आवास का नहीं, बल्कि इंसानियत और सिस्टम की साख का है।













