उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 15 सितंबर 2026 को तामेंगलोंग जिले में दो कुकी महिलाओं की गोली मारकर हत्या की गई
और कई फार्महाउसों में आग लगाए जाने की सूचना है। राज्य में मई 2023 से अब तक 306 मौतें और 49 लोगों के लापता होने का आंकड़ा अधिकारियों के हवाले से सामने आया है।
मणिपुर में जातीय हिंसा का दौर एक बार फिर चिंता बढ़ा रहा है। राज्य के तामेंगलोंग जिले में 15 सितंबर को दो कुकी महिलाओं की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद इलाके में कई फार्महाउसों में आग लगाए जाने की भी खबर सामने आई है। पुलिस और स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, घटना के पीछे कौन लोग थे, इसकी जांच की जा रही है। अभी तक किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।
बताया गया कि दोनों महिलाएं एक ग्रामीण इलाके में खेत की तरफ गई थीं। इसी दौरान हथियारबंद लोगों ने उन पर हमला कर दिया। रिपोर्टों के अनुसार दोनों की मौके पर ही गोली लगने से मौत हो गई। मृतकों की पहचान 60 वर्षीय चोंगा सिटल्होउ और 30 वर्षीय किम्बोई सिंगसन के रूप में की गई है। हमले के बाद आसपास के कुछ फार्महाउसों को भी आग के हवाले कर दिया गया।
खेत से लौटने से पहले ही हमला
रिपोर्टों के मुताबिक दोनों महिलाएं एक अलग-थलग इलाके में लकड़ी इकट्ठा करने और खेत के काम के लिए गई थीं। इसी दौरान उन पर हमला हुआ। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय लोगों ने शवों को बरामद किया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और हमलावरों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।
घटना ऐसे समय में हुई है जब तामेंगलोंग और आसपास के इलाकों में पहले से तनाव बना हुआ है। इससे दो दिन पहले भी जिले और पड़ोसी नॉनी जिले में अलग-अलग हमलों में चार लोगों की मौत हुई थी। एक घटना में एक दंपती की हत्या हुई थी, जबकि उनके छह वर्षीय बच्चे को गोली लगने से गंभीर चोट आई थी।
कई फार्महाउसों में आग लगाने की खबर
दो महिलाओं की हत्या के अलावा हमले के दौरान कई फार्महाउसों को आग लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। इन फार्महाउसों का इस्तेमाल ग्रामीण खेती और दूसरी आजीविका संबंधी गतिविधियों के लिए करते थे। आगजनी के कारण संपत्ति और ग्रामीणों की आजीविका को नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है।
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, हमले के बाद कुछ कच्चे फार्महाउसों को भी आग के हवाले किया गया। स्थानीय लोगों के हवाले से कुछ ग्रामीणों के संपर्क में नहीं होने की बात भी सामने आई है, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक तौर पर पूरी स्थिति स्पष्ट की जानी बाकी है।
2023 से जारी है मणिपुर में जातीय संघर्ष
मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा मई 2023 में शुरू हुई थी। इसके बाद से राज्य में बड़े पैमाने पर हिंसा, विस्थापन और जान-माल का नुकसान हुआ है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 3 मई 2023 से अब तक 306 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 49 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। यह आंकड़ा राज्य के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने विधानसभा में बताया था।
हिंसा के कारण हजारों लोगों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों या दूसरे सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। कई इलाकों में सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। समय-समय पर हिंसा की नई घटनाएं सामने आने से शांति बहाली की कोशिशों के सामने भी चुनौती बनी हुई है।
सितंबर में लगातार सामने आ रही हिंसा की घटनाएं
ताजा दोहरे हत्याकांड से पहले 13 सितंबर को भी तामेंगलोंग और नॉनी जिलों में अलग-अलग हमलों में चार लोगों की मौत हुई थी। पुलिस के मुताबिक हमलों के पीछे कौन लोग थे, इसकी जांच जारी है और किसी संगठन ने जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है।
इसके बाद 15 सितंबर को दो महिलाओं की हत्या और फार्महाउसों में आगजनी की घटना सामने आई। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने उन इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
हमलावरों की पहचान की जांच जारी
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दो महिलाओं की हत्या करने वाले लोगों की पहचान अभी स्पष्ट नहीं हुई है। घटना की जांच की जा रही है। किसी भी संगठन या समुदाय पर सीधे तौर पर जिम्मेदारी डालने से पहले जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।
कुछ स्थानीय संगठनों ने हमले की निंदा करते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और दोषियों की पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की है। स्थानीय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और हिंसा को आगे बढ़ने से रोकना है।
49 लोग अब भी लापता
मणिपुर में जारी संघर्ष के बीच 49 लोगों के लापता होने का आधिकारिक आंकड़ा भी सामने आया है। राज्य के गृह मंत्री द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, मई 2023 में शुरू हुई हिंसा के बाद 306 लोगों की मौत हुई है और 49 लोग अब भी लापता हैं। सरकार ने लापता लोगों के परिवारों को सहायता देने के मुद्दे पर भी विचार किए जाने की जानकारी दी है।
लापता लोगों के परिवारों के लिए यह स्थिति बेहद कठिन बनी हुई है, क्योंकि लंबे समय से अपने परिजनों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाना उनके लिए बड़ी चिंता का कारण है।
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
ताजा घटनाओं के बाद संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए खेतों और फार्महाउसों तक जाना भी जोखिम भरा महसूस हो सकता है। महिलाओं की हत्या और आगजनी की घटनाएं बताती हैं कि कुछ इलाकों में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
प्रशासन के सामने अब हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ लोगों के बीच भरोसा बहाल करने की चुनौती है। किसी भी पक्ष की ओर से हिंसा की नई घटना स्थिति को और जटिल बना सकती है।
मणिपुर में मई 2023 से जारी संघर्ष के बीच अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। तामेंगलोंग में दो महिलाओं की हत्या और फार्महाउसों में आगजनी की ताजा घटना इस लंबे संघर्ष में एक और गंभीर घटना के रूप में सामने आई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और हमले के पीछे शामिल लोगों की पहचान किए जाने का इंतजार है।














