अंबेडकरनगर. आजाद समाज पार्टी की स्थानीय जिला यूनिट ने बामसेफ, डीएस फोर एवं बसपा के संस्थापक मान्यवर कांशीराम की 91वीं जयंती के अवसर पर एक भव्य आयोजन विशाल मैरेज लॉन रगड़गंज अंबेडकरनगर में आयोजित किया जिसमें उन्होंने बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम के साथ काम करने वालों को आमंत्रित किया इस अवसर पर मान्यवर कांशीराम जी के साथ लम्बे समय तक काम करने वाले इंसानी भाईचारा बनाओ समिति के राष्ट्रीय संरक्षक एवं इस्लाम पार्टी हिंद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ एस अकमल ने अपने संबोधन में ऐतिहासिक उदगार व्यक्त करते हुए कहा कि दलित व पिछड़े वर्ग के महापुरुषों को शून्य से लेकर क्षितिज तक पहुंचाने में मुस्लिम समाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा है उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज अरब से नहीं आया बल्कि मूलनिवासीयों को यहां की ब्राह्मणवादी व्यवस्था के पोषकों ने नारकीय जीवन जीने के लिए विवश किया था उससे मुक्ति पाने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने बौद्ध धर्म, इस्लाम धर्म, ईसाई धर्म व सिक्ख धर्म को अंगीकार किया हमारा आप सबका डी एन ए एक है।
डॉ एस अकमल ने ऐतिहासिक तथ्यों का बखान करते हुए कहा कि महात्मा ज्योतिराव फूले, जिनके अथक प्रयासों से दलित, पिछड़ों की तकदीर व तस्वीर संवरी उन्हें संरक्षण देने का कार्य मुस्लिम समाज ने ही किया इस सम्बन्ध में उस्मान शेख और उनकी बहन फातिमा शेख का सुनहरा इतिहास है जिनके प्रयास के कारण ही पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फूले ने एक स्वर्णिम इतिहास रच दिया। इसी तरह बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर को संविधान सभा में पहुंचाने में भी मुस्लिम समाज का महत्वपूर्ण योगदान है जिसके कारण डॉ भीमराव अंबेडकर को भारतीय संविधान की संरचना करने का अवसर प्राप्त हुआ कहने का आशय यह है कि आज हम जिस मंच पर बोल रहे हैं उसके संस्थापक चंद्रशेखर आजाद को शून्य से शिखर तक पहुंचाने में मुस्लिम समाज का महत्वपूर्ण योगदान है जो किसी से छुपा हुआ नहीं है।
भीम आर्मी एवं आजाद समाज पार्टी के संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय चंद्रशेखर आजाद को शिखर पर पहुंचाने में सहारनपुर में घटित शब्बीरपुर की घटना का विशेष योगदान है चंद्रशेखर आजाद का जन्म संघर्ष की कोख से हुआ है इस संघर्ष में सांसद इमरान मसूद, पूर्व सांसद इलियास आजमी,पूर्व कैबिनेट मंत्री दददू प्रसाद, पूर्व मंत्री बशीरुद्दीन साहब जैसी हस्तियों का बहुत बड़ा हाथ है। 15 मार्च 2019 में जब चन्द्रशेखर आजाद ने दिल्ली में जंतर मंतर पर भीम आर्मी द्वारा मान्यवर कांशीराम के जन्मदिन पर कार्यक्रम किया था उस मंच पर मान्यवर कांशीराम की बहन सुखविंदर कौर, पूर्व केंद्रीय मंत्री माननीय शरद यादव, माननीय वामन मेश्राम बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व कैबिनेट मंत्री दददू प्रसाद, पूर्व मंत्री बशीरुद्दीन साहब, पूर्व सांसद इलियास आजमी साहब, बसपा सुप्रीमो मान्यवर कांशीराम साहब के इटावा लोकसभा चुनाव प्रभारी रहे खादिम अब्बास और स्वयं मैं डॉ एस अकमल भी उस मंच पर मौजूद थे इस मंच पर चंद्रशेखर आजाद ने घोषणा की थी कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध बनारस लोकसभा से चुनाव लड़ूंगा इस घोषणा भर से देश की राजनीति में तहलका मच गया था किन्ही कारणों से यह घोषणा परवान नहीं चढ़ सकी यदि ऐसा हो जाता तो देश की राजनीति की तकदीर व तस्वीर बदल जाती। आप लोगों को याद होना चाहिए कि 2024 के चुनाव में मुस्लिम समाज ने देशभर में इंडिया गठबंधन को वोट दिया लेकिन नगीना के मुसलमानो ने इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी को वोट न देकर चंद्रशेखर आजाद को एक तरफ़ा वोट देकर प्रचंड बहुमत से चंद्रशेखर आजाद को पार्लियामेंट पहुंचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाहन किया। यह बात डॉ एस अकमल इसलिए कह रहा है ताकि आप जाने की मुसलमानो को चंद्रशेखर आजाद से बेपनाह मोहब्बत है। इस मोहब्बत के कारण डॉ एस अकमल इंसानी भाईचारा बनाओ समिति के राष्ट्रीय संरक्षक एवं इस्लाम पार्टी हिंद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होने के बावजूद भी आपकी पार्टी के मंच पर मौजूद है। सन 1967 में बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की पार्टी आर पी आई एवं डॉ अब्दुल जलील फ़रीदी की मुस्लिम मजलिस के लीडरों ने मिलकर अलीगढ़ लोकसभा चुनाव में यह नारा बुलंद किया था कि, दलित मुसलमां करो विचार, कब तक सहोगे अत्याचार।
दलित मुस्लिम भाई-भाई, हिंदू कौम कहां से आई। यह नारा दलित और मुस्लिम समाज के लिए वरदान बन गया और अलीगढ़ जैसी लोकसभा सीट से आर पी आई के नेता बी पी मौर्य लोकसभा का चुनाव जीत गए कहने का आशय यह है कि आज गठबंधन का युग है हमें किसी को कमतर नहीं समझना चाहिए और फिरका परस्त ताकतों को परास्त करने के लिए एकजुट हो जाना चाहिए। माo कांशीराम जी कहते थे की मजलूम मजलूम मिलकर जुल्म और जालिम का मुकाबला करें और इस मुल्क का हुक्मरान बने।
*आमीन भाई*














