भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने विदेशी प्रभाव से जुड़े दावों को खारिज किया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि UPI से जुड़े प्रस्तावित बदलाव किसी बाहरी दबाव का नतीजा नहीं हैं। साथ ही सरकार ने यह भी साफ किया है कि आम नागरिकों से UPI के जरिए भुगतान करने पर कोई ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लिया जाएगा।
सरकार के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था में शुल्क केवल कुछ चुनिंदा बड़े मूल्य वाले व्यापारी लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR के रूप में लागू होगा। इसका भुगतान करने वाले ग्राहकों पर सीधे तौर पर कोई शुल्क नहीं होगा। सरकार ने यह भी कहा है कि UPI के जरिए होने वाले अधिकांश व्यापारी लेन-देन पहले की तरह शुल्क मुक्त रहेंगे।
विदेशी प्रभाव के दावों पर सरकार का स्पष्टीकरण
UPI की शुल्क व्यवस्था में बदलाव को लेकर हाल के दिनों में यह दावा सामने आया था कि इसके पीछे विदेशी कंपनियों या बाहरी प्रभाव की भूमिका हो सकती है। केंद्र सरकार ने इन दावों को निराधार और भ्रामक बताया है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, UPI भारत में विकसित डिजिटल भुगतान व्यवस्था है और इसे देश में वित्तीय समावेशन तथा डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित किया गया। सरकार ने कहा है कि UPI को 2016 में शुरू किया गया था और जनवरी 2020 से इसे नागरिकों और व्यापारियों के लिए मुफ्त रखा गया।
सरकार का कहना है कि मौजूदा बदलाव का उद्देश्य UPI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच उसके इकोसिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है। इसके तहत भुगतान व्यवस्था में शामिल बैंकों, पेमेंट ऐप और अन्य भागीदारों के लिए राजस्व का एक ढांचा तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा कोई शुल्क
सरकार ने सबसे महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण UPI इस्तेमाल करने वाले आम ग्राहकों को लेकर दिया है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, किसी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को UPI से पैसा भेजने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
यह नियम ट्रांजैक्शन की राशि से अलग रहेगा। यानी व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P भुगतान में राशि कितनी भी हो, ग्राहक से UPI ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लिया जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि UPI ऐप प्रोवाइडर लोगों से अलग से प्लेटफॉर्म या सिस्टम शुल्क नहीं ले सकेंगे। व्यक्तिगत यूजर्स के लिए मुफ्त UPI इस्तेमाल पर कोई मासिक कोटा या ट्रांजैक्शन की संख्या के आधार पर अलग सीमा भी प्रस्तावित नहीं की गई है।
₹2,000 तक के UPI भुगतान पर MDR नहीं
नई व्यवस्था में व्यापारी को किए जाने वाले ₹2,000 तक के UPI भुगतान को भी शून्य MDR के दायरे में रखा गया है। इसका मतलब है कि ग्राहक जब किसी व्यापारी को ₹2,000 तक का भुगतान UPI से करेगा, तो उस भुगतान पर MDR नहीं लगेगा।
इसके अलावा छोटे व्यापारियों के लिए भी कुछ विशेष प्रावधान रखे गए हैं। सरकार के अनुसार, छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-MDR व्यवस्था जारी रहेगी और इससे सड़क किनारे दुकान लगाने वाले, स्थानीय दुकानदार तथा छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त भुगतान लागत से बचाने का प्रयास किया गया है।
केवल चुनिंदा बड़े व्यापारी लेन-देन पर MDR
सरकार के नए स्पष्टीकरण के मुताबिक MDR केवल निर्धारित सीमा से ऊपर के कुछ व्यापारी लेन-देन पर लागू होगा। इसका उद्देश्य UPI के पूरे सिस्टम पर शुल्क लगाने के बजाय बड़े मूल्य वाले चुनिंदा व्यापारी भुगतान से भुगतान इकोसिस्टम के संचालन की लागत को पूरा करने के लिए राजस्व जुटाना है।
MDR का मतलब Merchant Discount Rate है। यह वह शुल्क है जो व्यापारी के डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने वाले भुगतान इकोसिस्टम के अलग-अलग भागीदारों के बीच वितरित होता है।
वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR सरकार या NPCI द्वारा टैक्स के रूप में वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। यह भुगतान व्यवस्था में शामिल विभिन्न पक्षों के बीच वितरित किया जाता है ताकि UPI के संचालन, तकनीकी ढांचे और भविष्य के विस्तार को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाया जा सके।
करीब 96 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन प्रभावित नहीं होंगे
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था का असर UPI के अधिकांश व्यापारी लेन-देन पर नहीं पड़ेगा। वित्त मंत्रालय ने बताया है कि करीब 96 प्रतिशत P2M यानी Person-to-Merchant लेन-देन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।
इसका एक कारण ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान का शून्य-MDR दायरे में रहना है। इसके अलावा छोटे व्यापारियों के लिए उपलब्ध शून्य-MDR व्यवस्था भी बड़ी संख्या में लेन-देन को शुल्क से बाहर रखेगी।
सरकार के अनुसार, MDR केवल करीब 4 प्रतिशत व्यापारी लेन-देन पर लागू होगा। इसलिए नई व्यवस्था को UPI के हर भुगतान पर शुल्क लगाने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
ग्राहकों पर MDR का बोझ डालने की अनुमति नहीं
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR का खर्च सीधे ग्राहकों पर डालने की अनुमति नहीं होगी। बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि व्यापारी UPI भुगतान स्वीकार करने के बदले ग्राहक से अलग से MDR या इसी तरह का शुल्क न वसूलें।
इसका मतलब यह है कि अगर कोई ग्राहक किसी दुकान पर UPI से भुगतान करता है, तो उसे केवल UPI का इस्तेमाल करने के कारण अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
सरकार ने UPI ऐप प्रोवाइडरों को भी प्लेटफॉर्म शुल्क या छिपे हुए शुल्क लगाने से रोकने की बात कही है।
UPI का बढ़ता दायरा
UPI भारत में डिजिटल भुगतान का सबसे प्रमुख माध्यम बन चुका है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2026 में UPI के जरिए 2,366 करोड़ लेन-देन हुए, जिनका कुल मूल्य करीब ₹29.9 लाख करोड़ रहा।
UPI का इस्तेमाल अब भारत के बाहर भी हो रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यह व्यवस्था 11 विदेशी देशों में लाइव है और कई अन्य देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के साथ UPI के तकनीकी ढांचे को लगातार मजबूत और टिकाऊ बनाए रखना जरूरी है।
सरकार ने बदलाव को क्यों जरूरी बताया?
सरकार का तर्क है कि UPI का विस्तार लगातार हो रहा है और आने वाले समय में इसके लिए बड़े स्तर पर तकनीकी निवेश, साइबर सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होगी।
अभी तक UPI को मुफ्त बनाए रखने के लिए अलग-अलग स्तर पर सरकारी प्रोत्साहन और सब्सिडी व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया है। सरकार का कहना है कि केवल सब्सिडी पर निर्भर रहना लंबे समय के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता। इसलिए ऐसा मॉडल तैयार करने की जरूरत है जिससे UPI का इकोसिस्टम आर्थिक रूप से टिकाऊ बना रहे और आम लोगों के लिए भुगतान सस्ता बना रहे।
UPI यूजर्स को क्या समझना चाहिए?
सरकार के मौजूदा स्पष्टीकरण के आधार पर आम UPI यूजर के लिए सबसे अहम बात यह है कि व्यक्ति-से-व्यक्ति भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इसी तरह ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर MDR नहीं लगेगा।
बड़े मूल्य वाले कुछ व्यापारी भुगतान में MDR लागू हो सकता है, लेकिन सरकार ने कहा है कि इसका भुगतान ग्राहक से सीधे शुल्क के रूप में नहीं कराया जाएगा। छोटे व्यापारियों के लिए भी शून्य-MDR व्यवस्था के प्रावधान मौजूद हैं।
इसलिए UPI को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही ऐसी जानकारी से सावधान रहने की जरूरत है जिसमें हर UPI भुगतान पर टैक्स या शुल्क लगाए जाने का दावा किया जा रहा हो। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है और आम यूजर्स के UPI भुगतान को शुल्क से मुक्त रखा गया है।
आगे क्या होगा?
सरकार द्वारा बनाए गए नए ढांचे के तहत UPI के संचालन और शुल्क व्यवस्था को लेकर आगे विस्तृत नियम लागू किए जाएंगे। मौजूदा ढांचे में ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान पर शून्य MDR और व्यक्ति-से-व्यक्ति सभी भुगतान मुफ्त रखने की बात स्पष्ट की गई है।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य UPI को आम नागरिकों के लिए सस्ता और सुलभ बनाए रखते हुए उसके तकनीकी और वित्तीय इकोसिस्टम को लंबे समय के लिए मजबूत करना है।
इस तरह UPI को लेकर फिलहाल सबसे बड़ा बदलाव यह नहीं है कि आम लोगों से भुगतान शुल्क लिया जाएगा, बल्कि यह है कि कुछ निर्धारित बड़े व्यापारी लेन-देन के लिए MDR व्यवस्था का रास्ता तैयार किया जा रहा है। सरकार ने विदेशी प्रभाव के दावों को भी खारिज करते हुए कहा है कि यह बदलाव UPI की दीर्घकालिक स्थिरता और विस्तार को ध्यान में रखकर किया गया है।














