पश्चिम बंगाल: पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी की संदिग्ध मौत, TMC कार्यालय में फंदे से लटका मिला शव
पश्चिम बंगाल की राजनीति में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी का शव बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित पार्टी कार्यालय में फंदे से लटका मिला। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटनास्थल से एक कथित सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और फिलहाल मौत के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
आशीष बनर्जी की मौत की खबर सामने आते ही पश्चिम बंगाल के राजनीतिक गलियारों में शोक और चर्चा का दौर शुरू हो गया। वह तृणमूल कांग्रेस के पुराने और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। वह रामपुरहाट विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहे और ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे। इसके बाद उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा का डिप्टी स्पीकर बनाया गया था।
घर से सटे TMC कार्यालय में मिला शव
जानकारी के मुताबिक, आशीष बनर्जी का घर रामपुरहाट के हटतला पाड़ा इलाके में है। उनके घर के पास ही तृणमूल कांग्रेस का पार्टी कार्यालय था। रविवार सुबह इसी कार्यालय में उनका शव फंदे से लटका हुआ पाया गया। सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई और पुलिस को जानकारी दी गई। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को नीचे उतारा और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की।
पुलिस ने घटनास्थल की जांच के दौरान एक कथित सुसाइड नोट भी बरामद किया है। अधिकारियों की ओर से नोट और घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत की परिस्थितियों को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
सुसाइड नोट में क्या लिखा?
घटनास्थल से मिले कथित सुसाइड नोट को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, नोट में आशीष बनर्जी ने लिखा कि उनकी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। नोट में उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन, भ्रष्टाचार के आरोपों और राजनीति में आने को लेकर भी निराशा व्यक्त की।
रिपोर्टों के मुताबिक, नोट में उन्होंने दावा किया कि वह कभी भ्रष्टाचार में शामिल नहीं रहे और किसी काम के बदले पैसे नहीं लिए। उन्होंने तारापीठ-रामपुरहाट डेवलपमेंट अथॉरिटी (TRDA) से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी भूमिका सीमित थी और वह टेंडर कमेटी में शामिल नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि भवन योजना की मंजूरी या NOC जारी करने जैसे मामलों में उनका कोई अधिकार नहीं था।
कथित नोट में राजनीति में आने को लेकर भी पछतावे की बात सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अपने परिवार की अगली पीढ़ी को राजनीति से दूर रहने की सलाह दी। हालांकि, नोट की प्रामाणिकता, उसमें लिखी बातों का संदर्भ और मौत से उसका संबंध जांच का विषय है। इसलिए इन बातों को फिलहाल जांच के दौरान सामने आए दावों के रूप में ही देखा जा रहा है।
पांच बार विधायक रहे आशीष बनर्जी
आशीष बनर्जी का राजनीतिक सफर लंबा रहा। वह रामपुरहाट विधानसभा सीट से पांच बार विधायक चुने गए। तृणमूल कांग्रेस सरकार में उन्होंने मंत्री के तौर पर भी काम किया। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने स्कूल शिक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली थी। बाद में 2 जुलाई 2021 से 7 मई 2026 तक वह पश्चिम बंगाल विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रहे।
राजनीति में आने से पहले आशीष बनर्जी शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहे थे। वह रामपुरहाट कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर रह चुके थे। छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे और बाद में तृणमूल कांग्रेस के साथ उनका राजनीतिक सफर आगे बढ़ा।
ममता बनर्जी की सरकार में लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने के कारण उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिना जाता था। उनके निधन की खबर ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भी शोक की स्थिति पैदा कर दी है।
2026 के विधानसभा चुनाव में मिली हार
आशीष बनर्जी के राजनीतिक जीवन में बड़ा बदलाव 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान आया। रामपुरहाट विधानसभा सीट पर उन्हें भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार ध्रुव साहा से हार का सामना करना पड़ा। इस चुनावी हार ने उनके लंबे राजनीतिक सफर को बड़ा झटका दिया। रिपोर्टों के अनुसार, वह इससे पहले लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे थे।
चुनाव में हार के बाद पार्टी संगठन में भी उनकी भूमिका में बदलाव आया। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की बीरभूम जिला कोर कमेटी के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वह सक्रिय राजनीति से कुछ दूरी बनाए हुए थे।
हालांकि, उनकी चुनावी हार, संगठनात्मक बदलाव और मौत के बीच किसी सीधे संबंध की पुष्टि पुलिस ने नहीं की है। इसलिए इन घटनाओं को जोड़कर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी।
मौत की वजह पर जांच जारी
आशीष बनर्जी की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई। पुलिस ने फिलहाल इसे संदिग्ध मौत के तौर पर जांच के दायरे में रखा है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और घटनास्थल से बरामद सामग्री की जांच की जा रही है। (AajTak Bangla)
कथित सुसाइड नोट में मौत की जिम्मेदारी किसी अन्य व्यक्ति पर नहीं डाले जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद जांच एजेंसियां घटनास्थल, नोट की प्रामाणिकता, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य परिस्थितियों की जांच करेंगी। इन सभी पहलुओं के आधार पर ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
आशीष बनर्जी की मौत ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद बड़ा बदलाव देखने को मिला है। लंबे समय तक विधायक और मंत्री रहे एक वरिष्ठ नेता की इस तरह मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल पुलिस जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। कथित सुसाइड नोट में लिखी बातों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि आशीष बनर्जी की मौत के पीछे वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और उनके अंतिम समय से जुड़े सवालों के जवाब क्या निकलकर सामने आते हैं।













