
महेवा/इटावा। महेवा ब्लॉक के ग्राम शेखूपुर में पटाखा चलाने के दौरान एक युवक के हाथ में गंभीर चोट लगने का मामला सामने आया है। हादसे में युवक का हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
बताया जा रहा है कि युवक ने अपनी पहचान सार्वजनिक करने से इनकार किया है। वहीं, उसने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि उसके पास पटाखा कहां से आया था। यही बात अब कई सवाल खड़े कर रही है।
आखिर गांवों और कस्बों में पटाखे पहुंच कहां से रहे हैं? क्या बिना अनुमति पटाखों की बिक्री या भंडारण तो नहीं हो रहा? यदि पटाखे बेचने का कारोबार नियमों के तहत हो रहा है तो इनके स्रोत और बिक्री की जांच कौन कर रहा है?
एक युवक के हाथ पर लगी आग ने पटाखों के अवैध कारोबार और कालाबाजारी की आशंका को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, बिना जांच के किसी व्यापारी या व्यक्ति पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा, लेकिन प्रशासन के लिए यह घटना जांच का विषय जरूर है।
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित विभाग को पटाखों की दुकानों, भंडारण स्थलों और बिक्री के स्रोत की जांच करनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विस्फोटक सामग्री नियमों के अनुसार बेची जा रही है या कहीं चोरी-छिपे इसका कारोबार तो नहीं चल रहा।
हादसे ने प्रशासन के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—अगर पटाखों की बिक्री नियमों के मुताबिक हो रही है तो युवक तक यह पटाखा पहुंचा कैसे? और अगर नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदार कौन है?
अब देखना होगा कि प्रशासन इस घटना को महज हादसा मानकर छोड़ता है या पटाखों की बिक्री और आपूर्ति की पूरी कड़ी की जांच कर सच्चाई सामने लाता है।









