इटावा में कबाड़ गोदाम से निकला 5 फीट लंबा अजगर, सर्पमित्र डॉ. आशीष त्रिपाठी ने सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा
इटावा। शहर के रामलीला रोड स्थित एक कबाड़ गोदाम में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब काम कर रहे कर्मचारियों की नजर बोरियों के नीचे बैठे करीब 5 फीट लंबे अजगर पर पड़ी। विशालकाय सांप को देखते ही गोदाम में मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। सूचना मिलने पर वन्यजीव विशेषज्ञ एवं सर्पमित्र डॉ. आशीष त्रिपाठी मौके पर पहुंचे और सावधानीपूर्वक रेस्क्यू अभियान चलाकर अजगर को सुरक्षित पकड़ लिया। बाद में उसे सामाजिक वानिकी विभाग के दिशा-निर्देशन में सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया।
गोदाम में अचानक दिखा अजगर
यह घटना इटावा के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित रामलीला रोड पर एक कबाड़ गोदाम की है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कर्मचारी रोज की तरह गोदाम में सामान की छंटाई कर रहे थे। इसी दौरान बोरियों के नीचे हलचल दिखाई दी। जब पास जाकर देखा गया तो वहां एक बड़ा अजगर बैठा हुआ था। सांप को देखते ही कर्मचारी घबरा गए और तुरंत गोदाम से बाहर निकल आए।
इसके बाद स्थानीय लोगों ने वन्यजीव विशेषज्ञ एवं सर्पमित्र डॉ. आशीष त्रिपाठी को सूचना दी।
सुरक्षित तरीके से किया गया रेस्क्यू

सूचना मिलते ही डॉ. आशीष त्रिपाठी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बिना किसी नुकसान के विशेष तकनीक का इस्तेमाल करते हुए अजगर को सुरक्षित पकड़ लिया। रेस्क्यू के दौरान आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखा गया ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो।
रेस्क्यू पूरा होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली और डॉ. आशीष त्रिपाठी के प्रयासों की सराहना की।
कौन-सी प्रजाति का था अजगर?
डॉ. आशीष त्रिपाठी ने बताया कि पकड़ा गया सांप पायथन मोलुरस (Indian Rock Python) प्रजाति का था। यह एक विषहीन सर्प है और इसके शरीर में विष नहीं होता। हालांकि उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी भी जंगली सांप से दूरी बनाए रखें और उसे पकड़ने या छेड़ने की कोशिश न करें।
उन्होंने बताया कि यदि अजगर काट ले, तो उसके दांतों से त्वचा पर गंभीर घाव हो सकता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ऐसे मामलों में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना आवश्यक होता है।
वन क्षेत्र में छोड़ा गया अजगर

रेस्क्यू के बाद अजगर को सामाजिक वानिकी विभाग, इटावा के दिशा-निर्देशन में सुरक्षित रूप से फिशर वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया। वन विभाग का उद्देश्य ऐसे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित पहुंचाना होता है ताकि वे मानव बस्तियों से दूर रह सकें।
वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत संरक्षित
डॉ. आशीष त्रिपाठी ने बताया कि भारतीय अजगर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित प्रजाति है। इस प्रजाति को मारना, घायल करना या किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाना कानूनन अपराध है, जिसके लिए जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं सांप दिखाई दे तो घबराएं नहीं और न ही उसे मारने का प्रयास करें। तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित सर्पमित्र को सूचना दें।
गोदाम मालिक ने जताया आभार
गोदाम मालिक गोविंद गुप्ता ने बताया कि अजगर को देखकर सभी कर्मचारी काफी डर गए थे। उन्हें आशंका थी कि कहीं किसी को नुकसान न पहुंच जाए। उन्होंने कहा कि समय पर पहुंचकर डॉ. आशीष त्रिपाठी ने सुरक्षित रेस्क्यू किया, जिससे सभी लोगों ने राहत महसूस की।
विशेषज्ञों की सलाह
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के मौसम में सांप और अन्य वन्यजीव भोजन या सुरक्षित स्थान की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंच सकते हैं। ऐसे समय में लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। यदि किसी घर, गोदाम या खेत में सांप दिखाई दे तो बिना घबराए विशेषज्ञों को सूचना दें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
इस सफल रेस्क्यू अभियान ने न केवल एक संरक्षित वन्यजीव की जान बचाई, बल्कि स्थानीय लोगों को भी सुरक्षित महसूस कराया और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।












