लखनऊ में जिस ग्रीन कॉरिडोर को शहर के ट्रैफिक को तेज और सुगम बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था
वही कॉरिडोर अब कई जगहों पर जाम और अव्यवस्था की वजह बनता नजर आ रहा है। हनुमान सेतु के पास सड़क की बनावट और 90 डिग्री के शार्प टर्न को लेकर वाहन चालकों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि इस मोड़ पर बड़े वाहनों से लेकर छोटे वाहन तक निकलने में परेशानी होती है और दिन के व्यस्त समय में यहां ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता है।
ग्रीन कॉरिडोर का उद्देश्य शहर के अलग-अलग हिस्सों के बीच यातायात को बेहतर बनाना और लोगों को जाम से राहत देना था। लेकिन कॉरिडोर के कुछ हिस्सों में सड़क की डिजाइन, अचानक आने वाले मोड़ और बार-बार होने वाले डायवर्जन के कारण यातायात व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का आरोप है कि जिस रास्ते से तेज और सुगम यातायात की उम्मीद की गई थी, वहां कई जगह वाहन चालकों को बेहद सावधानी के साथ निकलना पड़ता है।
हनुमान सेतु के पास 90 डिग्री का शार्प टर्न
हनुमान सेतु के आसपास ग्रीन कॉरिडोर पर बना एक तेज मोड़ वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। करीब 90 डिग्री का यह शार्प टर्न खास तौर पर बड़े वाहनों के लिए चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है। बस, भारी वाहन और दूसरे बड़े वाहन जब इस मोड़ से गुजरते हैं तो उन्हें गति कम करनी पड़ती है और मोड़ काटने में अतिरिक्त जगह की जरूरत होती है।
वहीं छोटे वाहनों के लिए भी अचानक आने वाला मोड़ परेशानी खड़ी कर सकता है। अगर किसी वाहन चालक को आगे से आने वाले ट्रैफिक का सही अंदाजा न हो तो इस हिस्से में जाम की स्थिति बन सकती है।
वाहन चालकों का कहना है कि सड़क को इस तरह डिजाइन किया जाना चाहिए कि यातायात लगातार चलता रहे और वाहनों को अचानक ब्रेक लगाने या बेहद तेज मोड़ लेने की जरूरत न पड़े।
दिनभर ट्रैफिक दबाव की शिकायत
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस इलाके में दिन के अलग-अलग समय पर ट्रैफिक का दबाव बना रहता है। ऑफिस जाने और लौटने के समय स्थिति और ज्यादा मुश्किल हो जाती है। सड़क पर वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ 90 डिग्री वाले मोड़ के पास वाहनों की गति धीमी हो जाती है और पीछे तक वाहनों की कतार लगने लगती है।
बड़ी बसों और अन्य भारी वाहनों के कारण कई बार छोटे वाहनों को भी आगे निकलने में परेशानी होती है। इससे सड़क की क्षमता प्रभावित होती है और ट्रैफिक धीरे-धीरे जाम में बदल जाता है।
लोगों का कहना है कि अगर कॉरिडोर को ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए बनाया गया है तो उसके डिजाइन और यातायात प्रबंधन की नियमित समीक्षा भी होनी चाहिए।
हर 100 मीटर पर डायवर्जन से बढ़ी परेशानी
ग्रीन कॉरिडोर के आसपास लगातार डायवर्जन भी वाहन चालकों की मुश्किल बढ़ा रहे हैं। लोगों का कहना है कि कुछ हिस्सों में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर डायवर्जन मिलने के कारण वाहन चालकों को बार-बार अपनी दिशा बदलनी पड़ती है।
डायवर्जन के कारण यातायात की गति कम होती है। अगर उसी समय सड़क पर ज्यादा वाहन मौजूद हों तो कुछ ही मिनटों में लंबा जाम लग सकता है। वाहन चालकों के मुताबिक, अचानक डायवर्जन आने पर बाहर से आने वाले या पहली बार इस रास्ते से गुजरने वाले लोगों को भी परेशानी होती है।
स्थानीय लोगों की मांग है कि जहां निर्माण कार्य या किसी अन्य वजह से डायवर्जन जरूरी हो, वहां पर्याप्त दूरी से स्पष्ट संकेतक लगाए जाएं। इससे वाहन चालक पहले से अपनी लेन और गति को नियंत्रित कर सकेंगे।
निशातगंज चौराहे पर भी ट्रैफिक का दबाव
ग्रीन कॉरिडोर से जुड़े इलाकों में निशातगंज चौराहा भी महत्वपूर्ण ट्रैफिक प्वाइंट है। यहां अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों का दबाव रहता है। आसपास के बाजार, आवासीय इलाके और मुख्य मार्ग होने के कारण दिनभर वाहनों की आवाजाही बनी रहती है।
चौराहे पर पैदल यात्रियों, दोपहिया वाहनों, कारों और सार्वजनिक परिवहन के वाहनों की आवाजाही के कारण कई बार यातायात धीमा हो जाता है। ऐसे में कॉरिडोर से आने वाला ट्रैफिक भी प्रभावित होता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ सड़क बना देने से ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर नहीं होती। सड़क की डिजाइन के साथ चौराहों का प्रबंधन, ट्रैफिक सिग्नल, लेन व्यवस्था और पैदल यात्रियों की आवाजाही को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
खाटू श्याम मंदिर के आसपास बढ़ी भीड़
इन दिनों खाटू श्याम मंदिर के आसपास दर्शनार्थियों की भीड़ भी ट्रैफिक व्यवस्था पर असर डाल रही है। मंदिर के आसपास आने वाले श्रद्धालुओं के साथ दुकानदारों, ऑटो और दूसरे वाहनों की मौजूदगी से सड़क पर अतिरिक्त दबाव बनता है।
दर्शन के लिए आने वाले लोग सड़क के किनारे वाहन खड़े कर देते हैं तो सड़क की उपलब्ध चौड़ाई और कम हो जाती है। इसके अलावा ऑटो और दूसरे सार्वजनिक वाहनों के रुकने से भी यातायात की गति प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के आसपास भीड़ वाले समय के लिए अलग ट्रैफिक प्लान की जरूरत है। पार्किंग की व्यवस्था, ऑटो के लिए निर्धारित स्थान और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ता बनाया जाए तो मुख्य सड़क पर दबाव कम किया जा सकता है।
ग्रीन कॉरिडोर पर सवाल क्यों?
ग्रीन कॉरिडोर जैसी बड़ी परियोजनाओं से लोगों को उम्मीद होती है कि शहर में आवागमन आसान होगा और पुराने जाम वाले रास्तों का दबाव कम होगा। लेकिन अगर कॉरिडोर पर ही ऐसे मोड़ और डायवर्जन हों जहां वाहनों की गति लगातार प्रभावित हो, तो परियोजना के उद्देश्य पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि सड़क की डिजाइन को लेकर अंतिम तकनीकी निष्कर्ष विशेषज्ञों और संबंधित विभाग की जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। किसी एक मोड़ या जाम की स्थिति के आधार पर पूरी परियोजना को असफल बताना तकनीकी रूप से उचित नहीं होगा।
लेकिन स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। यदि किसी हिस्से में लगातार दुर्घटना का खतरा, ट्रैफिक जाम या वाहनों के संचालन में परेशानी हो रही है, तो संबंधित विभाग को उसका निरीक्षण कर आवश्यक सुधार करने की जरूरत होती है।
VIP मूवमेंट और आम लोगों की परेशानी
स्थानीय लोगों के बीच यह धारणा भी चर्चा में है कि VIP आवाजाही के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था अलग तरीके से संचालित होती है, जबकि आम वाहन चालकों को सामान्य समय में जाम का सामना करना पड़ता है। हालांकि VIP मूवमेंट के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन के लिए पुलिस द्वारा विशेष व्यवस्था किए जाने की वजह अलग हो सकती है।
आम लोगों की मुख्य चिंता यह है कि रोजाना ऑफिस, स्कूल, कारोबार और दूसरे जरूरी कामों के लिए इस रास्ते का इस्तेमाल करने वाले लोगों को लगातार ट्रैफिक का सामना न करना पड़े।
लोग चाहते हैं कि सड़क ऐसी हो जहां बिना किसी विशेष व्यवस्था के भी सामान्य यातायात आसानी से चलता रहे।
समाधान के लिए क्या कदम जरूरी?
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के मुताबिक, हनुमान सेतु के पास शार्प टर्न की तकनीकी समीक्षा की जानी चाहिए। विशेषज्ञों से यह जांच कराई जा सकती है कि मोड़ को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए सड़क की ज्यामिति में कोई सुधार संभव है या नहीं।
इसके साथ ही डायवर्जन वाले स्थानों पर पर्याप्त संकेतक, रिफ्लेक्टर, लेन मार्किंग और रात में स्पष्ट दिखाई देने वाली व्यवस्था जरूरी है। निशातगंज और खाटू श्याम मंदिर के आसपास भीड़ के समय विशेष ट्रैफिक प्रबंधन लागू किया जा सकता है।
ऑटो और अन्य सार्वजनिक वाहनों के लिए निर्धारित स्टॉप बनाए जाने से सड़क के बीच या किनारे अनियंत्रित तरीके से वाहन रोकने की समस्या कम हो सकती है। वहीं मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग की बेहतर व्यवस्था होने से मुख्य मार्ग पर दबाव घट सकता है।
ग्रीन कॉरिडोर का उद्देश्य लखनऊ के यातायात को बेहतर बनाना है। ऐसे में परियोजना के उन हिस्सों की पहचान करना जरूरी है जहां लोगों को जाम या सुरक्षा संबंधी परेशानी हो रही है। समय रहते डिजाइन, डायवर्जन और ट्रैफिक प्रबंधन में जरूरी बदलाव किए जाएं तो इस मार्ग पर आम लोगों को राहत मिल सकती है।
फिलहाल हनुमान सेतु के पास शार्प टर्न, जगह-जगह डायवर्जन, निशातगंज चौराहे और खाटू श्याम मंदिर के आसपास बढ़ती भीड़ ने ग्रीन कॉरिडोर की यातायात व्यवस्था को चर्चा में ला दिया है। अब निगाहें संबंधित विभाग की कार्रवाई पर हैं कि इन समस्याओं का तकनीकी अध्ययन कर उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।













