उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में चर्चित विवेक तिवारी हत्याकांड में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है।
एप्पल कंपनी के सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की गोली मारकर हत्या किए जाने के मामले में अदालत ने उत्तर प्रदेश पुलिस के सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया है। वहीं, मामले में आरोपी दूसरे सिपाही संदीप कुमार को अदालत ने बरी कर दिया है।
यह मामला सितंबर 2018 में सामने आया था और घटना के बाद पूरे प्रदेश में इसकी चर्चा हुई थी। विवेक तिवारी की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई थी। घटना के बाद पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठे थे और मामले की जांच के साथ-साथ अदालत में भी सुनवाई चली।
क्या है पूरा मामला?
घटना 29 सितंबर 2018 की रात की बताई जाती है। विवेक तिवारी लखनऊ में एप्पल कंपनी में सेल्स मैनेजर के पद पर काम करते थे। घटना वाली रात वह खाना खाने के बाद अपनी कार से लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में पुलिस की बाइक पर सवार सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार ने उनकी कार को रोकने की कोशिश की।
आरोप था कि पुलिसकर्मियों ने कार को रुकने का इशारा किया, लेकिन कार नहीं रुकी। इसके बाद सिपाही प्रशांत चौधरी ने अपनी सरकारी पिस्टल से कार पर गोली चला दी। गोली लगने के बाद विवेक तिवारी गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे। विवेक तिवारी की मौत ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी बहस छेड़ दी थी।
कोर्ट में चली लंबी कानूनी प्रक्रिया
विवेक तिवारी की हत्या के मामले में आरोपी दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। मामले की जांच के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया और सुनवाई के दौरान अभियोजन तथा बचाव पक्ष की ओर से अपने-अपने तर्क रखे गए।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने मामले में अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया। वहीं, दूसरे आरोपी सिपाही संदीप कुमार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
अदालत के इस फैसले के बाद एक बार फिर 2018 के इस चर्चित मामले की चर्चा तेज हो गई है।
कार नहीं रोकने के बाद चली थी गोली
मामले में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, दोनों सिपाहियों ने विवेक तिवारी की कार को रोकने का प्रयास किया था। कार के नहीं रुकने के बाद गोली चलाए जाने की बात सामने आई थी। गोली लगने से विवेक तिवारी की जान चली गई।
घटना के बाद पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और मामले को अदालत में ले जाया गया। करीब आठ साल पुराने इस मामले में अब कोर्ट ने आरोपी पुलिसकर्मियों को लेकर अपना फैसला सुनाया है।
घटना के बाद पुलिस पर उठे थे सवाल
विवेक तिवारी की मौत के बाद पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल उठे थे। खासतौर पर इस बात को लेकर चर्चा हुई कि वाहन को रोकने के दौरान पुलिसकर्मी को गोली चलाने की जरूरत क्यों पड़ी और गोली चलाने की परिस्थितियां क्या थीं।
मामले ने उस समय काफी राजनीतिक और सामाजिक ध्यान आकर्षित किया था। घटना के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और पुलिसकर्मियों द्वारा बल प्रयोग के नियमों को लेकर भी चर्चा हुई।
अब अदालत के फैसले में प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार दिया गया है, जबकि संदीप कुमार को बरी कर दिया गया है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर
कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद अब प्रशांत चौधरी को दी जाने वाली सजा को लेकर भी कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। अदालत के फैसले के बाद दोनों पक्षों के पास कानून के तहत उपलब्ध विकल्पों के अनुसार आगे की कार्रवाई का रास्ता खुला रह सकता है।
विवेक तिवारी हत्याकांड करीब आठ साल से कानूनी प्रक्रिया में रहा है। अब कोर्ट के फैसले के बाद मामले में एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है। हालांकि दोषसिद्धि के बाद आगे की न्यायिक प्रक्रिया और संभावित अपील पर भी नजर रहेगी।
29 सितंबर 2018 की घटना ने मचा दी थी हलचल
29 सितंबर 2018 की रात हुई इस घटना ने लखनऊ ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में हलचल पैदा कर दी थी। एक निजी कंपनी के कर्मचारी की पुलिस की गोली से मौत होने के बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आया था।
विवेक तिवारी की मौत के बाद परिवार, पुलिस विभाग और प्रशासन के स्तर पर कई घटनाक्रम सामने आए थे। अब अदालत के फैसले के बाद इस पुराने मामले में एक अहम न्यायिक निर्णय सामने आया है।
कोर्ट ने सिपाही प्रशांत चौधरी को गैर इरादतन हत्या का दोषी माना है, जबकि संदीप कुमार को बरी कर दिया गया है। ऐसे में अब आगे की कानूनी प्रक्रिया और सजा से जुड़े निर्णय पर नजर बनी रहेगी।














