नोएडा पुलिस का बड़ा खुलासा: ऑनलाइन फ्रेंडशिप क्लब की आड़ में चल रहा था लूट का खेल, 3 युवतियां समेत 5 आरोपी गिरफ्तार
नोएडा। उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो ऑनलाइन फ्रेंडशिप क्लब के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाकर लूटपाट की वारदातों को अंजाम देता था। पुलिस ने इस गैंग की तीन युवतियों और दो युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, नकदी और वारदात में इस्तेमाल किए जाने वाले अन्य सामान भी बरामद किए गए हैं। पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान निधि यादव, प्रियंका यादव, काजल उर्फ रिया यादव, ओमवीर यादव और मंजेश यादव के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से फ्रेंडशिप क्लब संचालित करता था। आकर्षक प्रोफाइल और फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर युवकों से संपर्क किया जाता था। बातचीत बढ़ने के बाद उन्हें दोस्ती और मुलाकात का झांसा देकर तय स्थान पर बुलाया जाता था।
मुलाकात के दौरान गिरोह के अन्य सदस्य पहले से ही आसपास मौजूद रहते थे। जैसे ही युवक निर्धारित स्थान पर पहुंचता, उसे धमकाकर उसके पास मौजूद नकदी, मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड और अन्य कीमती सामान लूट लिया जाता था। कई मामलों में पीड़ितों को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर भी पैसे ऐंठे जाते थे। बदनामी के डर से अधिकांश पीड़ित पुलिस तक पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे, जिसका फायदा आरोपी लगातार उठाते रहे।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कुछ समय से इस प्रकार की घटनाओं की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। शिकायतों के आधार पर एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने तकनीकी निगरानी, मोबाइल लोकेशन और सोशल मीडिया गतिविधियों का विश्लेषण किया। जांच के दौरान पुलिस को इस गिरोह की गतिविधियों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिसके बाद छापेमारी कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी अलग-अलग नामों और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करते थे ताकि उनकी पहचान आसानी से न हो सके। सोशल मीडिया पर आकर्षक प्रोफाइल बनाकर लोगों का भरोसा जीता जाता था। बातचीत के दौरान पीड़ित को यह विश्वास दिलाया जाता था कि सामने वाला व्यक्ति वास्तव में दोस्ती करना चाहता है। इसके बाद मुलाकात तय कर पूरी योजना के तहत लूट की वारदात को अंजाम दिया जाता था।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह काफी समय से सक्रिय था और संभव है कि कई जिलों में भी इसने इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दिया हो। पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों, कॉल डिटेल और डिजिटल लेनदेन की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
पुलिस का कहना है कि कई बार लोग ऑनलाइन दोस्ती और रिश्तों के नाम पर बिना पूरी जानकारी के अनजान लोगों पर भरोसा कर लेते हैं। ऐसे मामलों में अपराधी इसी भरोसे का फायदा उठाकर ठगी, ब्लैकमेलिंग और लूट जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। इसलिए किसी भी अनजान व्यक्ति से मिलने से पहले उसकी पहचान की पुष्टि करना बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों का भी कहना है कि सोशल मीडिया और ऑनलाइन फ्रेंडशिप प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति से पहली मुलाकात हमेशा सार्वजनिक स्थान पर करनी चाहिए और अपने परिवार या दोस्तों को इसकी जानकारी जरूर देनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति मिलने के लिए सुनसान स्थान पर बुलाए या पैसे की मांग करे तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
नोएडा पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति ऑनलाइन फ्रेंडशिप, डेटिंग या दोस्ती के नाम पर संदिग्ध गतिविधि करता है या पैसे की मांग करता है, तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दें। समय पर दी गई जानकारी से ऐसे गिरोहों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है और अन्य लोगों को उनका शिकार बनने से बचाया जा सकता है।
फिलहाल पुलिस सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया और कितनी रकम की लूट या ठगी की।
यह मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि डिजिटल युग में ऑनलाइन दोस्ती और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सतर्क रहना कितना आवश्यक है। थोड़ी-सी लापरवाही किसी भी व्यक्ति को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव का भी शिकार बना सकती है। इसलिए अनजान लोगों पर आंख बंद कर भरोसा करने से बचें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।












