प्रतीक यादव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर उठे सवाल
चोटों के निशान, विसरा सुरक्षित और विशेषज्ञों की राय के बाद बढ़ी चर्चा
लखनऊ। समाजवादी पार्टी संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री Mulayam Singh Yadav के बेटे तथा भाजपा नेता Aparna Yadav के पति Prateek Yadav की मौत के बाद उनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। बुधवार को हुई उनकी मौत के बाद गुरुवार को लखनऊ में अंतिम संस्कार कर दिया गया, लेकिन अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतीक यादव की मौत
“कार्डियोरेस्पिरेटरी कोलैप्स ड्यू टू मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म”
यानी फेफड़ों में खून का थक्का जमने के कारण हुई। यह पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के पैनल ने प्रोफेसर डॉ. मौसमी सिंह की अगुवाई में किया था।

हालांकि रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों का भी जिक्र किया गया है, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सवाल उठने लगे हैं।
शरीर पर छह चोटों के निशान
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक प्रतीक यादव के शरीर पर कुल छह चोटों के निशान पाए गए। इनमें सीने, दाहिने हाथ के ऊपरी और निचले हिस्से, दाहिनी कलाई, कोहनी और बाईं कलाई पर चोटें शामिल हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इनमें से तीन चोटें लगभग पांच से सात दिन पुरानी थीं, जबकि बाकी तीन चोटें करीब एक दिन पुरानी बताई गई हैं। इसके अलावा प्रतीक यादव के दिल, खून के थक्के और विसरा को आगे की जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है।
फोरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक विसरा सुरक्षित रखना सामान्यतः तब जरूरी माना जाता है जब मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई हो या विष संबंधी जांच की आवश्यकता हो।
सिविल अस्पताल में मृत अवस्था में लाए गए थे
लखनऊ के सिविल अस्पताल प्रशासन के अनुसार प्रतीक यादव को बुधवार सुबह करीब 5:55 बजे अस्पताल लाया गया था और उस समय वह मृत अवस्था में थे।

सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेश चंद्र पांडेय ने बताया कि अस्पताल पहुंचने के बाद पुलिस को सूचना दी गई और फिर पंचनामा कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
यही तथ्य अब सवालों को और बढ़ा रहा है कि आखिर अस्पताल लाने से पहले क्या हुआ था और क्या इलाज में कोई देरी हुई थी।
सपा विधायक ने उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और लखनऊ मध्य से विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भी इस मामले को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रतीक यादव की मौत “संदिग्ध परिस्थितियों” में हुई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में पोस्टमार्टम नहीं कराया जाता, इसलिए इसकी गहन जांच जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि पोस्टमार्टम के बाद शव को मोर्चरी में चार घंटे तक क्यों रखा गया।
रविदास मेहरोत्रा ने यह भी पूछा कि क्या प्रतीक यादव को अस्पताल पहुंचाने में देरी हुई थी, क्योंकि उन्हें मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था।
विशेषज्ञों की राय ने बढ़ाई चर्चा
वरिष्ठ डॉक्टर दायम रज़ा खान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आगे की जांच रिपोर्ट का इंतजार जरूरी है।
उन्होंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि शरीर पर मौजूद कई चोटें गंभीर थीं और रिपोर्ट में मस्तिष्क के दोनों हिस्सों में सब-अराक्नोइड हैमरेज का भी जिक्र है, जो सिर में गंभीर चोट की ओर संकेत करता है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
फोरेंसिक विशेषज्ञों ने क्या कहा?
फोरेंसिक साइंस रिसर्चर मीनाक्षी शुक्ला ने कहा कि उपलब्ध पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर अभी अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने अंतिम निष्कर्ष सुरक्षित रखा है और आगे की रासायनिक तथा वैज्ञानिक जांच का इंतजार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि टॉक्सिकोलॉजी यानी शरीर में किसी विष, दवा, शराब या जहरीले रसायन की मौजूदगी की जांच अभी लंबित है। इसलिए यह संभावना पूरी तरह खत्म नहीं की जा सकती कि मौत किसी रासायनिक प्रतिक्रिया या विषैले पदार्थ के कारण हुई हो।
फोरेंसिक विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक एफएसएल रिपोर्ट और विसरा जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक मौत को पूरी तरह प्राकृतिक, दुर्घटनात्मक या संदिग्ध मानना वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं होगा।
पहले से चल रहा था इलाज
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रतीक यादव का इलाज मेदांता अस्पताल में चल रहा था। डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें सांस लेने में परेशानी की शिकायत थी और वह खून पतला करने वाली दवाएं ले रहे थे।
मेदांता अस्पताल की डॉक्टर रूचिता शर्मा के अनुसार फेफड़ों में रुकावट के कारण उनके दिल की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही थी।
अखिलेश यादव का बयान

प्रतीक यादव के निधन के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने कहा कि कुछ दिन पहले ही उनकी मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रतीक को स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह दी थी।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि कारोबार में होने वाला नुकसान कभी-कभी व्यक्ति को मानसिक रूप से काफी प्रभावित कर देता है। उन्होंने परिवार के साथ खड़े रहने की बात कही।
कौन थे प्रतीक यादव?
मुलायम सिंह यादव और साधना गुप्ता के बेटे
अखिलेश यादव के सौतेले भाई
भाजपा नेता अपर्णा यादव के पति
फिटनेस और बिजनेस में रुचि
राजनीति से दूरी बनाए रखी
अब आगे क्या?
फिलहाल पूरे मामले में सबसे ज्यादा नजर विसरा रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच पर टिकी हुई है। पुलिस की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक जांच पूरी होने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।













