भरथना में आर्य समाज का 103वां भव्य वार्षिकोत्सव, वेदकथा और महायज्ञ का आयोजन
आर्य समाज मन्दिर भरथना का 103 वां वार्षिकोत्सव के उपलक्ष्य में विश्व कल्याण महायज्ञ एवम वेदकथा की अमृतवर्षा का पँच दिवसीय आयोजन 11 कुंडीय महायज्ञ के साथ सम्पन्न हुआ जिसमें 44 जोड़ों सहित सैकड़ों धार्मिक सज्जनों ने आहुति प्रदान कर विश्व के कल्याण की कामना की आगरा से पधारे अंतर्राष्ट्रीय उपदेशक आचार्य हरीशंकर अग्निहोत्री जी ने कार्यक्रम के अंतिम व्याख्यान में बताया कि यज्ञ ही से विश्व का कल्याण सम्भव है यज्ञ ही सनातन की मूल परम्परा व संस्क्रति है उन्होंने बताया जब तक प्रत्येक मनुष्य के विचार अच्छे नही होंगे तब तक राष्ट्र परम वैभव को प्राप्त नही कर सकता इसलिए प्रत्येक मनुष्य को अच्छे कर्म करने चाहिए और दुष्कर्मो से बचना चाहिए जब मनुष्य स्वयं अच्छा बन जायेगा तो पूरा समाज अच्छा बन जायेगा और जब समाज अच्छा बनेगा तो पूरा राष्ट्र अच्छा बन जायेगा और हम पुनः वैभवशाली भारत बना पाएंगे इत्यादि उपदेश कर उन्होंने सभी यज्ञमानो को आशीर्वाद प्रदान कर कार्यक्रम का समापन किया यज्ञ के पश्चात सभी धार्मिक बन्धुओं प्रसाद ग्रहण किया कार्यक्रम में – स्वामी प्रभुवेश ,भगवान दास आर्य,देवेंद्र भँशाली, शुरेश चन्द्र आर्य, अजय आर्य,अरुण आर्य(अन्नू),राजकमल आर्य,प्रधान अनिल आर्य,मंत्री मोहन आर्य,कोषाध्यक्ष सतेन्द्र आर्य,उप प्रधान पुरोहित राजेश आर्य,नंदकिशोर आर्य ,उप मंत्री अनुराग आर्य,रामलखन आर्य, वैभव आर्य,नवीन आर्य,उत्कर्ष आर्य,लक्ष्य आर्य,राधा देवी आर्या,मंजू आर्या,आरती आर्या आदि आर्यजनों की उपस्तिथि रही

पाँच दिवसीय 103वें भव्य वार्षिकोत्सव के अवसर पर विश्व कल्याण महायज्ञ एवं वेदकथा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म लाभ प्राप्त किया। इस दौरान वैदिक प्रवक्ता आचार्य हरीशंकर अग्निहोत्री ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य को मिला यह जीवन अत्यंत दुर्लभ है। यह शरीर जीवात्मा को जन्म-मरण के बंधनों से मुक्ति दिलाने के लिए मिला है।














