अखबार में खाना परोसना स्वास्थ्य के लिए खतरा, FSSAI की चेतावनी फिर चर्चा में
भारत में लंबे समय से सड़क किनारे ठेलों, छोटे होटलों, मिठाई की दुकानों और यहां तक कि कई घरों में भी अखबार का उपयोग खाने-पीने की चीजों को रखने, पैक करने या परोसने के लिए किया जाता रहा है। समोसे, कचौड़ी, पकौड़े, जलेबी, नमकीन और अन्य खाद्य पदार्थ अक्सर अखबार में लपेटकर दिए जाते हैं। हालांकि यह तरीका वर्षों से आम प्रचलन में रहा है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार इसे खतरनाक बताते रहे हैं।
हाल ही में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा अखबार में भोजन परोसने और पैक करने के खिलाफ चेतावनी को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के कई देशों में दशकों पहले ही यह समझ लिया गया था कि अखबार और अन्य मुद्रित कागजों का सीधा संपर्क भोजन से होना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके बावजूद भारत में यह प्रथा लंबे समय तक जारी रही।
आखिर अखबार में खाना रखना खतरनाक क्यों है?
अखबार छापने के लिए जिस स्याही का उपयोग किया जाता है, उसमें कई प्रकार के रसायन मौजूद होते हैं। इन रसायनों में रंग, पिगमेंट, सॉल्वेंट और अन्य रासायनिक तत्व शामिल हो सकते हैं। जब गर्म या तैलीय खाद्य पदार्थ अखबार के संपर्क में आते हैं तो स्याही में मौजूद कुछ तत्व भोजन में मिल सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक ऐसे दूषित भोजन का सेवन स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। कुछ रसायनों को कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम से भी जोड़ा जाता है। इसके अलावा यह शरीर के विभिन्न अंगों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।
गर्म भोजन से बढ़ जाता है खतरा
चिकित्सकों का कहना है कि खतरा तब और बढ़ जाता है जब गर्म या तेलयुक्त भोजन सीधे अखबार पर रखा जाता है। गर्मी और तेल स्याही में मौजूद रसायनों को भोजन में स्थानांतरित होने में मदद कर सकते हैं। यही कारण है कि पकौड़े, समोसे, पराठे और अन्य गर्म खाद्य पदार्थों को अखबार में रखना विशेष रूप से असुरक्षित माना जाता है।
कई बार दुकानदार लागत बचाने के लिए पुराने अखबारों का उपयोग करते हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को यह समझना चाहिए कि कुछ पैसे बचाने के लिए स्वास्थ्य से समझौता करना उचित नहीं है।
सिर्फ स्याही ही नहीं, संक्रमण का भी खतरा
अखबार केवल रासायनिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि स्वच्छता के लिहाज से भी सुरक्षित नहीं माना जाता। अखबार कई हाथों से होकर गुजरता है। छपाई, परिवहन, वितरण और बिक्री के दौरान उस पर धूल, गंदगी और विभिन्न प्रकार के सूक्ष्म जीवाणु लग सकते हैं।
ऐसे में जब भोजन सीधे अखबार के संपर्क में आता है तो संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए यह अधिक जोखिमपूर्ण हो सकता है।
पहले से मौजूद हैं नियम
खाद्य सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अखबार में भोजन पैक करने के खिलाफ चेतावनी कोई नई बात नहीं है। कई वर्षों से इस विषय पर दिशानिर्देश मौजूद हैं। समय-समय पर खाद्य सुरक्षा एजेंसियां लोगों और दुकानदारों को जागरूक करती रही हैं कि खाद्य पदार्थों को केवल खाद्य-ग्रेड सामग्री में ही रखा या पैक किया जाना चाहिए।
इसके बावजूद देश के कई हिस्सों में यह प्रथा आज भी जारी है। इसका मुख्य कारण जागरूकता की कमी और सस्ते विकल्पों की तलाश माना जाता है।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लोगों को अखबार में परोसे जाने वाले भोजन से बचना चाहिए। यदि किसी दुकान या ठेले पर खाद्य पदार्थ अखबार में दिए जा रहे हों तो उपभोक्ताओं को इसका विरोध करना चाहिए और सुरक्षित पैकेजिंग की मांग करनी चाहिए।
विशेषज्ञ यह भी स
देते हैं कि घरों में भी भोजन को रखने या ढकने के लिए अखबार का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। कई लोग रसोई में तली हुई चीजों का अतिरिक्त तेल सोखने के लिए अखबार का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन यह भी उचित नहीं माना जाता।
सुरक्षित विकल्प क्या हैं?
खाद्य पदार्थों के लिए फूड-ग्रेड पेपर, बटर पेपर, स्वच्छ पेपर बैग, स्टील के बर्तन, खाद्य-ग्रेड कंटेनर और अन्य प्रमाणित पैकेजिंग सामग्री का उपयोग किया जा सकता है। ये विकल्प भोजन को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करते हैं।
दुकानदारों और खाद्य व्यवसाय संचालकों को भी चाहिए कि वे ग्राहकों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करें।
जागरूकता की है सबसे ज्यादा जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नियम बना देना पर्याप्त नहीं है। जब तक आम जनता और खाद्य विक्रेताओं के बीच जागरूकता नहीं बढ़ेगी, तब तक इस समस्या का समाधान पूरी तरह संभव नहीं होगा। स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर खाद्य सुरक्षा से जुड़े अभियान चलाने की आवश्यकता है।
लोगों को यह समझना होगा कि भोजन केवल स्वाद का नहीं बल्कि स्वास्थ्य का भी विषय है। छोटी-छोटी लापरवाहियां भविष्य में बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
निष्कर्ष
अखबार में भोजन परोसना या पैक करना एक पुरानी और आम प्रथा जरूर रही है, लेकिन आधुनिक स्वास्थ्य मानकों के अनुसार यह सुरक्षित नहीं मानी जाती। विशेषज्ञ लंबे समय से इसके संभावित खतरों की ओर ध्यान दिलाते रहे हैं। रासायनिक प्रदूषण, संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को देखते हुए भोजन के लिए सुरक्षित और खाद्य-ग्रेड पैकेजिंग का उपयोग करना ही बेहतर विकल्प है।
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक समाज बनाने के लिए आवश्यक है कि उपभोक्ता, दुकानदार और संबंधित एजेंसियां मिलकर खाद्य सुरक्षा के नियमों का पालन करें। आखिरकार, थोड़ी सी सावधानी भविष्य में होने वाले बड़े नुकसान से बचा सकती है।
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