रोजगार सेवकों ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, लंबित मानदेय और स्थायी नीति की उठाई मांग
इटावा। ग्राम रोजगार सेवक पंचायत मित्र वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के बैनर तले सोमवार को जिले के सैकड़ों रोजगार सेवकों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ला को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। जिलाध्यक्ष राजकिशोर राज के नेतृत्व में पहुंचे रोजगार सेवकों ने सरकार से नियमित मानदेय, अलग बजट व्यवस्था और भविष्य सुरक्षित करने के लिए मानव संसाधन नीति लागू करने की मांग उठाई।
ज्ञापन में रोजगार सेवकों ने बताया कि वर्ष 2006 से मनरेगा योजना के अंतर्गत प्रदेश की ग्राम पंचायतों में संविदा के आधार पर कार्यरत ग्राम रोजगार सेवक पिछले करीब 17 वर्षों से ग्रामीण विकास और मनरेगा कार्यों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित रूप से मानदेय का भुगतान नहीं हो पा रहा है, जिससे आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

रोजगार सेवकों का कहना है कि वर्तमान में उनका मानदेय मनरेगा योजना के प्रशासनिक मद से दिया जाता है। बजट की कमी के कारण कई महीनों तक भुगतान लंबित रहता है। उन्होंने मांग की कि मानदेय के लिए अलग से बजट का प्रावधान किया जाए अथवा सामग्री मद से भुगतान की व्यवस्था लागू की जाए, ताकि समय पर वेतन मिल सके।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि प्रदेश के कई रोजगार सेवकों का 12 से 14 माह का मानदेय बकाया है। समय पर भुगतान न होने से कई कर्मचारी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं और मानसिक तनाव में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उन्होंने लंबित भुगतान तत्काल जारी करने की मांग की।
रोजगार सेवकों ने मुख्यमंत्री द्वारा 4 अक्टूबर 2021 को की गई घोषणा का हवाला देते हुए मानव संसाधन नीति (एचआर पॉलिसी) लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इस नीति के तहत रोजगार सेवकों का भविष्य सुरक्षित किया जाए और न्यूनतम 24 हजार रुपये मासिक वेतन निर्धारित किया जाए।

इसके अलावा उन्होंने ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए रोजगार सेवकों को हटाने की प्रक्रिया में संशोधन की मांग की। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में ग्राम पंचायत सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से हटाने का प्रावधान है, जबकि इसे ग्राम सभा के दो-तिहाई बहुमत के आधार पर किया जाना चाहिए।
रोजगार सेवकों ने अन्य कई मांगें भी उठाईं, जिनमें विभागीय कर्मचारी का दर्जा देना, जॉब चार्ट में अतिरिक्त कार्य शामिल करना, मनरेगा कार्यों की बेहतर मॉनिटरिंग के लिए एंड्रॉयड मोबाइल फोन उपलब्ध कराना, न्याय पंचायत स्तर पर स्थानांतरण व्यवस्था लागू करना और मृतक आश्रितों को सेवा में अवसर प्रदान करना शामिल है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की तर्ज पर 20 दिन का आकस्मिक अवकाश और 12 दिन का चिकित्सा अवकाश देने की भी मांग की।

जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते समय विभिन्न ब्लॉकों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में रोजगार सेवक मौजूद रहे। इनमें बसरेहर ब्लॉक अध्यक्ष पुरन सिंह, महेवा ब्लॉक अध्यक्ष रविंद्र सिंह, ताखा ब्लॉक अध्यक्ष राजीव कुमार, बढ़पुरा ब्लॉक अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह, सैफई ब्लॉक अध्यक्ष बिट्टू यादव, चकरनगर ब्लॉक अध्यक्ष भानु गुर्जर, जसवंतनगर ब्लॉक अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह, भरथना ब्लॉक अध्यक्ष धर्मवीर सिंह, जिला महामंत्री सतीश नगर, जिला प्रभारी विशाल सिंह सहित सैकड़ों रोजगार सेवकों ने हिस्सा लिया।
रोजगार सेवकों ने मुख्यमंत्री से उनकी समस्याओं का समाधान कर न्याय दिलाने की मांग की है।













